हिंदी सिनेमा की दिवंगत अभिनेत्री मधुबाला का नाम आते ही आंखों के सामने मुस्कुराता और खूबसूरती से भरा चेहरा उभर आता है. लेकिन, इस चेहरे के पीछे गहरा दर्द छिपा था. मधुबाला असल जिंदगी में गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रही थीं. यह बीमारी सेहत के साथ-साथ उनके करियर, निजी जीवन और भविष्य की उम्मीदों पर भी भारी पड़ी. 14 फरवरी, 1933 को दिल्ली में जन्मीं मधुबाला को बचपन से ही दिल की बीमारी थी, जिसे मेडिकल भाषा में वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है. उस दौर में इस बीमारी का न तो सही इलाज था और न ही भारत में इसकी चिकित्सा सुविधाएं मौजूद थीं.
डॉक्टरों ने शूट करने से किया था मना
डॉक्टरों की सलाह थी कि वे ज्यादा मेहनत और तनाव न लें. डॉक्टरों ने उन्हें यहां तक कह दिया था कि शूटिंग उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है. लेकिन, मजबूरियों और काम के प्रति जुनून के चलते वह नहीं रुकी और बीमारी को छुपाकर काम करती रही. फिल्मी करियर के शुरुआती सालों में बीमारी उतनी उग्र नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे काम का दबाव बढ़ा, उनकी हालत बिगड़ती चली गई.
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मधुबाला के आखिरी दिनों को जब बहन ने किया था याद
मधुबाला की बहन मधुर भूषण ने फिल्म फेयर को दिए पुराने इंटरव्यू में कहा, आपा (दीदी) एक कंकाल की तरह हो गई थीं. लोग उनसे मिलना चाहते थे. लेकिन वह नहीं चाहती थीं कि कोई उन्हें देखे. वह खुद को शीशे में देखकर कहतीं, देखों मैं क्या से क्या हो गई. अगर लोग मेरे लुक्स पर कमेंट करेंगे तो मैं और ज्यादा रोउंगी. आपा ने कभी हमसे मदद नहीं मांगी. वह खुद नहातीं और खुद खाना खाती. उनके पास एक ऑक्सीजन सिलेंडर रखा गया था क्योंकि उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती थी. वह कहतीं थीं, मुझ पर पैसा खर्च मत करो. मैं नहीं बचूंगी. कमाने के लिए कोई और नहीं है.
'मुगल-ए-आजम' की शूटिंग में हो जाती थी हालत खराब
लंबी शूटिंग, भारी कॉस्ट्यूम और लगातार सफर ने उनके दिल पर गहरा असर डाला. कई बार ऐसा हुआ जब शूटिंग के दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी, चक्कर आए, या खून की उल्टियां भी हुईं, लेकिन वह सेट पर बनी रहीं. मधुबाला की बीमारी का सबसे कठिन दौर उस समय आया, जब वह फिल्म 'मुगल-ए-आजम' की शूटिंग कर रही थीं. यह फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान बनी, लेकिन इसी फिल्म ने उनके शरीर से ताकत छीन ली. शीश महल के मशहूर सीन की शूटिंग के दौरान वह ठंडे फर्श पर घंटों खड़ी रहीं, जबकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी. शूटिंग के बाद अक्सर उनकी हालत इतनी बिगड़ जाती थी कि उन्हें सीधे कमरे में ले जाया जाता था.
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गर्भधारण करने से किया गया था मधुबाला को मना
बीमारी बढ़ने के बाद मधुबाला को इलाज के लिए लंदन ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके पास ज्यादा समय नहीं है. उस वक्त वह अपने करियर के शिखर पर थीं. डॉक्टरों ने उन्हें शादी और गर्भधारण से भी मना किया था, क्योंकि इससे उनकी जान को खतरा हो सकता था. लेकिन, मधुबाला ने जिंदगी को अपने तरीके से जीने का फैसला किया. शादी के बाद बीमारी ने उन्हें लगभग घर तक सीमित कर दिया. ऑक्सीजन सिलेंडर, नर्स और डॉक्टर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए. फिल्मों के ऑफर आते रहे, लेकिन वह चाहकर भी उन्हें स्वीकार नहीं कर पाईं. बीमारी के साथ सबसे दर्दनाक पहलू अकेलापन रहा. जिस इंडस्ट्री ने उन्हें सितारा बनाया था, वही धीरे-धीरे उनसे दूर होती चली गई. 23 फरवरी 1969 को महज 36 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.
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