Renowned Urdu Poet Bashir Badr Passes Away at 91: उर्दू शायरी के मशूहर शायर डॉ. बशीर बद्र का 28 मई 2026 को निधन हो गया. बशीर बद्र 91 वर्ष के थे. उनकी शायरी से तो शायद ही कोई अछूता होगा जिसने जिंदगी की हर खुशी और गम को छुआ है. लेकिन उनकी शायरी से जुड़ा एक किस्सा है जिसने एक सुपरस्टार को छुआ है. हम बात कर रहे हैं दिलीप कुमार की. बशीर बद्र और दिलीप कुमार का एक ऐसा दिलचस्प किस्सा है जो दिल को छू लेता है. ये ऐसा किस्सा है जो दिखाता है कि शायर की ताकत उसकी कलम है और जब कलम सच बोलती है तो बात दूर तक जाती है.
यह कहानी बशीर बद्र के बेटे, मशहूर गीतकार नुसरत बद्र की जुबानी सामने आई, जिन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्मों देवदास और सावरिया के लिए गाने. नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, किस्सा कुछ यूं है कि नुसरत बद्र एक दिन दिलीप कुमार साहब से ऑटोग्राफ मांगने पहुंचे. जब दिलीप कुमार को पता चला कि यह युवक बशीर बद्र का बेटा है, तो वे थोड़ा भावुक हो गए. उन्होंने साधारण ऑटोग्राफ की जगह बशीर बद्र की मशहूर गजल का वो अमर शेर लिख दिया:
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
ना जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए!'
यह शेर बशीर बद्र की सबसे लोकप्रिय रचनाओं में से एक है, जो जीवन की अनिश्चितता और यादों की रोशनी को बेहद सादगी से बयान करती है. दिलीप कुमार जैसे दिग्गज अभिनेता के इस इजहार ने शायरी के प्रति उनके गहरे लगाव को दिखाया. वैसे भी दिलीप कुमार का शायरी को लेकर खासा रुझान था. नुसरत बद्र इस घटना को बार-बार शेयर करते थे और कहते थे कि यह पल उनके पिता की शायरी की लोकप्रियता का सबूत था.
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