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हिंदी सिनेमा का वो एक्टर जिसे अंग्रेज सरकार ने दी थी फांसी, परिवार ने मान लिया शहीद, कैसे बची इसकी जान? 500 से ज्यादा फिल्मों में किया सपोर्टिंग रोल

हम बॉलीवुड के जिस एक्टर की बात कर रहे हैं उन्होंने करीब 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. वह केवल हिंदी ही नहीं भोजपुरी सिनेमा में भी जाना-पहचाना नाम रहे हैं.

हिंदी सिनेमा का वो एक्टर जिसे अंग्रेज सरकार ने दी थी फांसी, परिवार ने मान लिया शहीद, कैसे बची इसकी जान? 500 से ज्यादा फिल्मों में किया सपोर्टिंग रोल
हिंदी सिनेमा के असली हीरो
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में ऐसे कई कलाकार रहे हैं जिन्होंने सिर्फ परदे पर ही नहीं असल जिंदगी में भी हीरो वाले काम किये हैं. ऐसे हीरो जो देश की आजादी की लड़ाई में सक्रीय रहे. ऐसा एक नाम है एक्टर नजीर हुसैन का. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई, जेल भी गए. इतना ही नहीं उन्हें फांसी की सजा भी सुनाई गई थी. लेकिन उन्होंने अपनी जान बचाई जिंदगी को दोबार शुरी किया और इतने बड़े कलाकार बने. नजीर हुसैन का जन्म 15 मई 1922 को उत्तर प्रदेश के उसिया गांव में हुआ था. उनके पिता शहबाज खान भारतीय रेलवे में गार्ड थे.

पिता की सिफारिश से नजीर को भी रेलवे में फायरमैन की नौकरी मिल गई, लेकिन कुछ महीने बाद ही उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी और ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हो गए. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हें सिंगापुर और मलेशिया में पोस्टिंग मिली. युद्ध के हालात में उन्हें बंदी बना लिया गया और मलेशिया की जेल में रखा गया. कुछ समय बाद उन्हें भारत भेज दिया गया. भारत लौटकर उन्होंने ब्रिटिश आर्मी छोड़ दी और आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए. सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने खुद को पूरी तरह देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया.

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Photo Credit: social media

अंग्रेजों के खिलाफ प्रचार-प्रसार में जुटे रहने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी की सजा सुना दी गई. लंबे समय तक घर न लौटने पर परिवार ने उन्हें शहीद समझ लिया. एक बार जब अंग्रेज अधिकारी उन्हें ट्रेन से हावड़ा से दिल्ली ले जा रहे थे, तब नजीर ने चुपके से एक कागज पर अपना हाल लिखा और दिलदारनगर जंक्शन पर खिड़की से फेंक दिया. उसी चिट्ठी से परिवार को पता चला कि वे जिंदा हैं. परिवार ने उन्हें छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. देश आजाद होने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया.

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आजादी के बाद नजीर हुसैन ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा. बिमल रॉय ने उन्हें मौका दिया. वे ज्यादातर सपोर्टिंग रोल में नजर आए, फिर भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. परिणीता, जीवन ज्योति, मुसाफिर, अनुराधा, साहिब बीबी और गुलाम, नया दौर, कटी पतंग और कश्मीर की कली जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया. कुल मिलाकर उन्होंने 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. इसके अलावा वो भोजपुरी सिनेमा में भी जाना-माना नाम बने.

नजीर हुसैन की जिंदगी सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स की है जिसने आजादी की लड़ाई में अपनी जान की परवाह नहीं की और बाद में कला के जरिए अपनी पहचान बनाई.

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