शादी हो, महिला संगीत हो या डांस का मौका...एक ऐसा गाना है, जो बजते ही लोग खुद को थिरकने से रोक नहीं पाते. मजेदार बात ये है कि इस गाने पर कभी खूब विवाद भी हुआ था. कुछ लोगों ने इसे फूहड़ बताया, तो महिलाओं के एक वर्ग ने इसके बोल और अंदाज पर आपत्ति भी जताई. लेकिन इन सबके बावजूद इसकी पॉपुलैरिटी जरा भी कम नहीं हुई. 45 साल बाद भी ये गाना हर जश्न की जान बना हुआ है. दिलचस्प बात ये है कि इसकी शुरुआत किसी फिल्म से नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक पुराने लोकगीत से हुई थी, जिसे बाद में अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज और अंदाज से अमर बना दिया.
देसी लोकगीत बना सुपरहिट
'मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है' कोई नया फिल्मी गाना नहीं था. ये उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के गांवों में पीढ़ियों से गाया जाने वाला पारंपरिक लोकगीत था. शादी-ब्याह, तीज-त्योहार और महिला संगीत में इसे हंसी-मजाक और नोकझोंक के अंदाज में गाया जाता था. साल 1981 में प्रकाश मेहरा ने इस लोकगीत को अपनी फिल्म लावारिस में शामिल किया. संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने इसे नया फिल्मी रंग दिया, जबकि अमिताभ बच्चन ने इसे अपनी आवाज में गाया. इतना ही नहीं, बिग बी ने गाने में अलग-अलग महिलाओं का रूप धरकर ऐसा परफॉर्म किया कि ये सीन हिंदी सिनेमा के सबसे आइकॉनिक पलों में शामिल हो गया.
फूहड़ता का विवाद भी हुआ
गाना रिलीज होते ही जबरदस्त हिट हो गया, लेकिन इसके साथ विवाद भी जुड़ गया. कई लोगों ने इसके बोल और महिलाओं को दिखाने तरीके पर सवाल उठाए. कुछ महिला संगठनों ने इसे फूहड़ और महिलाओं का मजाक उड़ाने वाला बताया. हालांकि दर्शकों का प्यार इन विवादों पर भारी पड़ा. समय बीतता गया, लेकिन इस गाने की चमक फीकी नहीं पड़ी. आज भी शादी, संगीत, ऑर्केस्ट्रा, स्टेज शो और डीजे की प्लेलिस्ट में ये गाना सबसे पहले बजने वालों में शामिल रहता है. नई पीढ़ी भी इसे उतने ही उत्साह से सुनती है, जितना 80 के दशक के लोग सुनते थे.
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