तलपित विजय की आने वाली फिल्म जन नायकन के लिए मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही हैं. विजय की फिल्म को एक बड़ा झटका लगा है, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 जनवरी) को प्रोड्यूसर्स की याचिका खारिज कर दी और उन्हें मद्रास हाई कोर्ट जाने को कहा. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ये निर्देश तब आया जब मेकर्स ने उन पर जल्दी सुनवाई करने का दबाव डाला. जन नायकन जो 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, सेंसर बोर्ड से अपने क्लीयरेंस सर्टिफिकेट का इंतजार कर रही है. एच विनोद के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म KVN प्रोडक्शंस के बैनर तले आ रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने आज (15 जनववरी) मद्रास हाई कोर्ट से विजय की फिल्म जन नायकन से जुड़ी अपील पर 20 जनवरी को फैसला करने को कहा. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा के वे याचिका सुनने के लिए बाध्य नहीं हैं. इसे जन नायकन के प्रोड्यूसर्स की जल्दबाजी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के तौर पर भी देखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के लिए सेंसर क्लीयरेंस मांगने वाली प्रोड्यूसर्स की याचिका भी खारिज कर दी, जिसे विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, इससे पहले कि वह अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम के साथ पूरी तरह से राजनीति में आ जाएं.
जन नायकन के प्रोड्यूसर्स की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला एक फिल्म से जुड़ा है. "मैंने 9 जनवरी की तारीख तय की थी. मेरे पास भारत में 5,000 थिएटर थे. मुझे बताया गया था कि मुझे 10 कट के साथ सर्टिफिकेट मिलेगा." इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खारिज किए गए आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह बहुत तेज स्पीड है मिस्टर रोहतगी. जब मामला 20 जनवरी को डिविजन बेंच के सामने तय है. आप उस आदेश को चुनौती नहीं दे सकते जिसे खारिज कर दिया गया है... डिविजन बेंच के पास वापस जाएं."
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने भी याचिका पर तंज कसते हुए कहा, "हम उन सभी जजों का स्वागत करेंगे जो फाइलिंग के एक या दो दिन के अंदर मामलों का निपटारा करते हैं. ऐसा सभी मामलों में होना चाहिए... सिर्फ आपके मामले में क्यों... लेकिन यह बहुत तेज स्पीड है." विजय-स्टारर जन नायकन के प्रोड्यूसर्स द्वारा दायर याचिका मद्रास हाई कोर्ट की दो-जजों की बेंच के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसने सिंगल बेंच के सेंसर बोर्ड को UA सर्टिफिकेट देने के निर्देश पर रोक लगा दी थी.
हाल ही में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने जन नायकन मामले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर की थी, जिसमें अनुरोध किया गया था कि पहले उनका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए. यह कदम KVN प्रोडक्शंस के मद्रास हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद उठाया गया है.
मद्रास हाई कोर्ट ने सिंगल-जज के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें सेंसर बोर्ड को विजय-स्टारर फिल्म 'जन नायकन' को UA सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था और पोंगल की छुट्टियों के बाद 21 जनवरी को मामले की सुनवाई तय की थी.
9 जनवरी को, मद्रास हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया था कि जरूरी बदलाव लागू होने के बाद UA सर्टिफिकेट जारी करे. कोर्ट ने फिल्म के खिलाफ ऐसी शिकायतें सुनने के लिए बोर्ड की आलोचना भी की थी और चेतावनी दी थी कि इससे एक "खतरनाक चलन" शुरू हो सकता है. हालांकि आदेश पारित होने के तुरंत बाद, सेंसर बोर्ड ने इस फैसले को चुनौती दी और तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया, जिस पर उसी दिन बाद में सुनवाई हुई.
सेंसर बोर्ड ने पहले तर्क दिया था कि 'जन नायकन' में सशस्त्र बलों से जुड़े प्रतीक चिन्ह हैं, जिनकी जांच विशेषज्ञों द्वारा की जानी चाहिए. जबकि 'जन नायकन' अभी भी सेंसर क्लीयरेंस का इंतजार कर रही है.
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