बॉलीवुड अभिनेत्री और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund) की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकार (Sexual and Reproductive Health and Rights) एडवोकेट, सोहा अली खान ने इंडिया इम्पैक्ट AI समिट 2026 में महिलाओं और लड़कियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को और सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए नैतिक (ethical) और लैंगिक दृष्टि से संवेदनशील (gender-responsive) AI को अपनाने पर ज़ोर दिया है.
सोमवार को भारत मंडपम में “प्रौद्योगिकी में जेंडर की पुनर्कल्पना: सुरक्षित डिजिटल भविष्य की रचना और समावेशी प्लेटफॉर्म के लिए नैतिक एआई को आगे बढ़ाना” (“Reimagining Gender in Technology: Designing Safer Digital Futures and Advancing Ethical AI for Inclusive Platforms”) विषय पर आयोजित एक हाई-लेवल सेशन में बॉलीवुड अभिनेत्री ने अपने निजी अनुभव को सामने रखते हुए ये अहम बयान दिया.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और जोखिमों का हवाला देते हुए सोहा अली खान ने कहा, “तकनीक ने लाखों भारतीय महिलाओं के लिए सीखने, काम करने और अपनी बात रखने के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन इन अवसरों का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब महिलाएं ऑनलाइन सुरक्षित महसूस करें. हमारे पास यह मौका है कि हम एआई को इस तरह विकसित करें कि वह महिलाओं की सुरक्षा करें और डिजिटल स्पेस में अधिक से अधिक आवाजों को आत्मविश्वास के साथ आगे आने में मदद करे.”
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के पहले दिन आयोजित यह सत्र संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund) द्वारा इंक्लूईड यू (Ikigai Law) और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेलबोर्न विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया. इस विशेष सत्र में भारत में जेंडर-संवेदनशील AI व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही मजबूत करने पर नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं ने विस्तार से चर्चा की. भारत में 100 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूज़र्स हैं और देश तेजी से डिजिटल दुनिया से जुड़ रहा है. ऐसे में AI को लेकर भारत इस वैश्विक स्तर पर नैतिक, समावेशी और अधिकार-आधारित तकनीकी मानक तय करने में अहम भूमिका निभाने की क्षमता रखता है.
चर्चा के दौरान AI सुरक्षित डिज़ाइन, भारतीय भाषाओं में काम करने वाली AI प्रणालियां, और भारत में डिजिटल जेंडर गैप को कम करने से होने वाले फायदों पर बात हुई. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund) इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनार ने आगाह किया कि भारत के डिजिटल भविष्य में महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और गरिमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए.
“AI के क्षेत्र में भारत का नेतृत्व हमें यह अवसर देता है कि हम शुरू से ही ऐसी प्रणालियां बनाएं जो सुरक्षित, न्यायपूर्ण और जवाबदेह हों और मानवता को आगे बढ़ाएं. तकनीक को महिलाओं के अधिकारों के केंद्र में रखकर डिजाइन और संचालित करने से, हम सिर्फ नुकसान को कम नहीं करते, बल्कि गरिमा, बराबरी और सशक्तिकरण के लिए साझा मानक के रास्ते खोलते हैं.” सत्र में इस बात पर सहमति बनी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने में जिम्मेदार एआई (Responsible AI) का उपयोग करना ज़रूरी होगा.
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