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This Article is From Nov 08, 2025

जब धर्मा प्रोडक्शन बंद होने की कगार पर था, तब यह सुपरस्टार बना करण जौहर के लिए मसीहा

करण जौहर चाहते थे कि शाहरुख खान उनके पिता की फिल्म डुप्लीकेट में काम करें और इसके लिए उन्होंने विवेक वासवानी को आधीरात में कॉल किया था.

जब धर्मा प्रोडक्शन बंद होने की कगार पर था, तब यह सुपरस्टार बना करण जौहर के लिए मसीहा
धर्मा प्रोडक्शन बंद होने की कगार पर था तब एक एक्टर ने की मदद
नई दिल्ली:

बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, रियल लाइफ में भी किसी हीरो से कम नहीं हैं. शाहरुख ने कई लोगों की मदद की है. करण जौहर की जिंदगी में भी शाहरुख की कुछ ऐसी ही जगह है.दरअसल ये कहानी उस वक्त की है जब करण जौहर के पिता यश जौहर का धर्मा प्रोडक्शन लगभग बंद होने की कगार पर था. लगातार कई फ्लॉप फिल्मों के बाद कंपनी की हालत इतनी खराब हो गई थी कि करण खुद घबराए हुए थे. उस वक्त धर्मा की ‘गुमराह', ‘दुनिया' और ‘मुकद्दर का फैसला' जैसी फिल्में बुरी तरह फ्लॉप हो चुकी थीं. करण जौहर ने अपने पिता की हालत देखकर आधी रात को अभिनेता और निर्माता विवेक वासवानी को फोन किया और कहा था, 'मेरे पिता मर जाएंगे'. उसी दौर में शाहरुख खान एक उभरते हुए स्टार थे और करण जौहर को उम्मीद थी कि अगर शाहरुख उनकी फिल्म कर लें, तो हालात बदल सकते हैं.

शाहरुख नहीं करना चाहते थे महेश भट्ट की फिल्म
विवेक वासवानी ने बताया कि उस वक्त महेश भट्ट, यश जौहर की अगली फिल्म डुप्लीकेट डायरेक्ट करने वाले थे. लेकिन शाहरुख उस फिल्म को करने के मूड में नहीं थे. फोन पर बातों में तो इतना तनाव बढ़ गया कि शाहरुख ने अपने सेक्रेटरी से भी नाराज़गी जताई. सबको लग रहा था कि शाहरुख अब इस फिल्म का हिस्सा नहीं बनेंगे. लेकिन जब विवेक वासवानी ने उन्हें यश जौहर की आर्थिक हालत के बारे में बताया, तो शाहरुख बिना एक पल सोचे फिल्म के लिए राजी हो गए. उन्होंने न फीस की बात की, न स्क्रिप्ट की, बस दोस्ती निभाने के लिए हामी भर दी.

फिल्म फ्लॉप हुई लेकिन शाहरुख बन गए असली हीरो
साल 1998 में रिलीज हुई डुप्लीकेट बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी. लेकिन इस फिल्म ने शाहरुख की इमेज को लोगों के दिलों में और बड़ा कर दिया. करण जौहर के परिवार के लिए ये फिल्म उम्मीद की किरण बन गई. बाद में यही शाहरुख, करण जौहर की कुछ कुछ होता है, कभी खुशी कभी ग़म और माय नेम इज़ खान जैसी सुपरहिट फिल्मों का चेहरा बने. शाहरुख ने सिर्फ एक फिल्म नहीं की, बल्कि दोस्ती और इंसानियत की मिसाल कायम की. यही वजह है कि आज भी करण जौहर और शाहरुख खान की बॉन्डिंग बॉलीवुड की सबसे मजबूत दोस्तियों में गिनी जाती है.

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