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सलमान खान की फिल्म का वो विदाई गीत, जो सुपरहिट होकर भी बना मनहूस, 35 साल से आज तक कभी नहीं बजा शादियों में

सलमान खान की फिल्म ‘सनम बेवफा’ का गाना ‘मेरी जान चली दुश्मन के घर’ सुपरहिट तो हुआ, लेकिन इसके दर्दनाक बोलों की वजह से यह कभी शादियों की विदाई का हिस्सा नहीं बन पाया.

सलमान खान की फिल्म का वो विदाई गीत, जो सुपरहिट होकर भी बना मनहूस, 35 साल से आज तक कभी नहीं बजा शादियों में
सनम बेवफा सलमान खान की सुपरहिट फिल्म

बेटी की विदाई किसी भी परिवार के लिए खुशी और भावनाओं से भरा पल होता है. शादी के दिन जहां एक तरफ नए रिश्ते बनने की खुशी होती है, वहीं दूसरी तरफ बेटी के घर छोड़ने का दुख भी हर किसी की आंखें नम कर देता है. यही वजह है कि बॉलीवुड में बने विदाई गीत वर्षों से शादियों का अहम हिस्सा रहे हैं. ‘बाबुल की दुआएं लेती जा' जैसे गाने आज भी विदाई के समय बजते हैं और माहौल को भावुक बना देते हैं. लेकिन हिंदी सिनेमा में एक ऐसा भी विदाई गीत है, जो बेहद लोकप्रिय होने के बावजूद कभी शादी-ब्याह का हिस्सा नहीं बन पाया. यह गाना लोगों को पसंद तो आया, लेकिन इसकी कहानी और बोल इतने दर्दभरे थे कि परिवारों ने इसे विदाई के मौके पर बजाने से दूरी बना ली.

‘सनम बेवफा' का वो गाना जिसने सबको रुला दिया

हम बात कर रहे हैं साल 1991 में रिलीज हुई सलमान खान और चांदनी स्टारर फिल्म ‘सनम बेवफा' के मशहूर गीत ‘मेरी जान चली दुश्मन के घर' की. यह गाना फिल्म के सबसे भावुक दृश्यों में से एक पर फिल्माया गया था. कहानी में दो परिवारों के बीच गहरी दुश्मनी दिखाई गई थी और इसी वजह से बेटी की शादी भी एक दर्दनाक मोड़ ले लेती है.

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गाने में एक पिता अपनी बेटी को विदा तो कर रहा होता है, लेकिन उसके दिल में यह दर्द भी होता है कि वह ऐसे घर जा रही है, जिसे वह अपना नहीं मानता. गाने के बोल और उसका माहौल इतना भावुक था कि दर्शक इस दृश्य से जुड़ गए. हालांकि यह गीत फिल्म की सफलता का बड़ा हिस्सा बना, लेकिन इसकी भावना आम विदाई गीतों से बिल्कुल अलग थी.

शादी की विदाई से क्यों रहा दूर

आमतौर पर विदाई के गीतों में बेटी के सुखी जीवन, आशीर्वाद और नए सफर की बात होती है. लेकिन ‘मेरी जान चली दुश्मन के घर' में खुशी से ज्यादा बिछड़ने और मजबूरी का दर्द दिखाया गया. खासकर ‘दुश्मन के घर' जैसे शब्द लोगों को असहज महसूस कराते थे. यही कारण रहा कि यह गाना सुनने वालों के दिलों को छू गया, लेकिन शादी की रस्मों का हिस्सा नहीं बन सका. 

दूसरी तरफ इसी फिल्म के ‘हरे दुपट्टे वाले', ‘मुझे अल्लाह की कसम' और टाइटल ट्रैक जैसे गाने खूब लोकप्रिय हुए और लोगों की जुबान पर चढ़ गए. आज भी ‘मेरी जान चली दुश्मन के घर' को बॉलीवुड के सबसे अनोखे और दर्दभरे विदाई गीतों में गिना जाता है, लेकिन यह शायद इकलौता ऐसा सुपरहिट गीत है जिसे लोग सुनना तो पसंद करते हैं, मगर अपनी बेटी की विदाई में बजाना नहीं चाहते.

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लेखक के बारे में
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शिखा यादव
चीफ सब एडिटर
दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री ली. पिछले 10 साल से डिजिटल मीडिया में सक्रिय और इन 10 साल में बॉलीवुड, हॉलीवुड... और पढ़ें
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