एक ऐसे उद्योग में जहां सफलता को आंकड़ों से मापा जाता है, कुछ ही पल ऐसे होते हैं जब ये आंकड़े इतिहास बन जाते हैं. धुरंधर के साथ रणवीर सिंह ने ऐसा ही एक ऐतिहासिक पल रचा है, जब उन्होंने एक ही भाषा हिंदी में अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का नेतृत्व किया. यह उपलब्धि सिर्फ अपने विशाल पैमाने के कारण नहीं, बल्कि अपनी यात्रा के कारण भी खास है. धुरंधर ने किसी क्षणिक उछाल पर भरोसा नहीं किया, बल्कि धीरे-धीरे मजबूत होती गई, अपनी पकड़ बनाए रखी और हफ्तों तक शानदार प्रदर्शन करती रही. फिल्म ने अपने पांचवें मंगलवार (33वें दिन) को भारत में ₹831.40 करोड़ की नेट कमाई का आंकड़ा छू लिया, जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नया मील का पत्थर है.

इस असाधारण सफलता के केंद्र में रणवीर सिंह का दमदार अभिनय है. उन्होंने बड़े कैनवास पर रचे गए इस किरदार में नियंत्रण, गहराई और स्पष्टता के साथ जान फूंकी है. उनकी मौजूदगी संतुलित होते हुए भी बेहद प्रभावशाली है, जो कहानी को भव्यता और भावनाओं के साथ आगे बढ़ने देती है. यही संतुलन फिल्म को हर वर्ग के दर्शकों से जोड़ता है और इसकी रफ्तार को बनाए रखता है.
ट्रेड विश्लेषकों और दर्शकों दोनों से फिल्म को भरपूर सराहना मिली है. इसकी लगातार मजबूत कमाई इस बात का प्रमाण है कि दर्शक रणवीर सिंह पर कितना भरोसा करते हैं, न सिर्फ एक सुपरस्टार के तौर पर, बल्कि एक ऐसे कलाकार के रूप में जो हर किरदार में ईमानदारी और मजबूती लाता है. दर्शक उनके निभाए किरदार और फिल्म के अनुभव, खासकर इसकी शानदार कहानी के लिए बार-बार सिनेमाघरों तक लौटे.

आंकड़ों से परे, “हम्जा” का किरदार एक सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. यह भूमिका आम बातचीत का हिस्सा बन गई है, जो दर्शाता है कि इसने दर्शकों पर कितना गहरा प्रभाव छोड़ा है. जब कोई किरदार पर्दे से निकलकर लोगों की जिंदगी में जगह बना ले, तो वह अभिनय की स्थायी छाप को दर्शाता है.
धुरंधर के साथ रणवीर सिंह ने अपने करियर में एक निर्णायक अध्याय जोड़ दिया है. अब तक की सबसे बड़ी सिंगल-लैंग्वेज हिंदी फिल्म का नेतृत्व कर उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए एक नया मानदंड स्थापित किया है. यह पल समर्पण, कला और दर्शकों से गहरे जुड़ाव का प्रतीक है एक ऐसा कीर्तिमान जो हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा.
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