अनिल कपूर और राजेश खन्ना, ये दो नाम सुनते ही बॉलीवुड का सुनहरा दौर याद आ जाता है, लेकिन इसी चमक के पीछे एक ऐसी कहानी भी छुपी है जो उतनी ही कड़वी है. एक वक्त था जब सब कुछ सही चल रहा था, बड़े स्टार, बड़ी उम्मीदें और मजबूत पहचान, लेकिन अचानक हालात ऐसे बदले कि सब कुछ डगमगा गया. अनिल कपूर ने उसी दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे एक झटका उनके परिवार के लिए सब कुछ बदल गया और उन्होंने बहुत करीब से देखा कि इंडस्ट्री किस तरह वक्त के साथ अपना रंग बदलती है.
एक फ्लॉप और बदल गया सब कुछ
अनिल कपूर ने बताया कि उनके पिता सुरिंदर कपूर एक प्रोड्यूसर थे और इंडस्ट्री में उनकी अच्छी पहचान थी. लेकिन एक फिल्म, जिसमें सुपरस्टार राजेश खन्ना थे, और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई. इस फिल्म से सभी को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजा आते ही माहौल पूरी तरह बदल गया. अनिल के मुताबिक, जो लोग पहले उनके पिता के साथ खड़े थे, वही धीरे-धीरे दूरी बनाने लगे और कुछ ही समय में ऐसा लगा जैसे इंडस्ट्री ने पूरी तरह किनारा कर लिया हो.
जब इंडस्ट्री ने कर लिया किनारा
उन्होंने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि उनके पिता को हर जगह नजरअंदाज किया जाने लगा. हालात इतने खराब हो गए कि एक बार जब वो दूसरे शहर पहुंचे, तो उन्हें लेने तक कोई नहीं आया. अनिल ने कहा कि ये पल उनके लिए बेहद दर्दनाक था, क्योंकि उन्होंने पहली बार अपने पिता को इस तरह टूटते हुए देखा था. जो इंसान हमेशा मजबूत नजर आता था, वो उस दिन अंदर से पूरी तरह टूट चुका था और उसकी आंखों में आंसू थे.
उसी दर्द ने बनाया हीरो
यही घटना अनिल कपूर के लाइफ का टर्निंग पॉइंट बनी. उन्होंने तय किया कि उन्हें खुद एक्टर बनना है और अपने परिवार को ऐसे हालात से बाहर निकालना है. हालांकि, उनके पिता ने उन्हें सीधे लॉन्च करने से मना कर दिया और साफ कहा कि अगर उन्हें एक्टर बनना है तो खुद अपने दम पर पहचान बनानी होगी. अनिल ने इस चैलेंज को एक्सेप्ट किया, कम उम्र में काम शुरू किया और लगातार मेहनत करते हुए इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई. आज उनकी सफलता सबके सामने है, लेकिन इसके पीछे वो दर्द छुपा है जिसने उन्हें मजबूत बनाया और एक फ्लॉप फिल्म की कहानी को उनकी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया.
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