Raaj Kumar Son: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार रहे जिन्होंने अपने अंदाज और स्टाइल से दर्शकों के बीच ऐसी छाप छोड़ की अमर हो गए. ऐसे ही एक कलाकार रहे राजकुमार. ये नाम सुनते ही उनका हेयरस्टाइल, लुक, डायलॉग बोलने का अंदाज दिमाग में आ जाता है. उनकी डायलॉग डिलिवरी का अंदाज इतना जुदा था कि आज तक कोई उन जैसा दोबारा देखने को नहीं मिला. फैन्स ने उनके बेटे पुरु राजकुमार में भी यही झलक ढूंढने की कोशिश की लेकिन एक एक्टर के तौर पर वे खुद को कभी उस तरह स्थापित नहीं कर सके जिस तरह उनके पिता राजकुमार ने किया था. पुरु राजकुमार की जिदंगी की सबसे बड़ी विडंबना यही थी कि उनकी पहली फिल्म रिलीज होने से पहले ही राजकुमार इस दुनिया को अलविदा रह चुके थे.
साल 2014 में आई थी पुरु राजकुमार की आखिरी फिल्म
30 मार्च को पुरु राजकुमार (Puru Raaj Kumar) का जन्मदिन होता है. इस मौके पर उनका एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया. आखिरी बार साल 2014 में फिल्म एक्शन जैक्सन थी. इसके बाद से पुरु ने कोई प्रोजेक्ट साइन नहीं किया.
पिता राजकुमार नहीं देख पाए बेटे की पहली फिल्म
पुरु की पहली फिल्म साल 1996 में आई थी. इस फिल्म का नाम बाल ब्रह्मचारी था. इससे पहले कि वह पिता की सलाह लेते और उनकी देखरेख में काम करते उनका निधन हो गया. राजकुमार के निधन से पुरु राजकुमार बुरी तरह टूट गए. उनके ऊपर मानों दुखों को पहाड़ टूट पड़ा. एक तरफ घर की जिम्मेदारी तो दूसरी तरफ करियर का प्रेशर. वह दोनों के बीच ऐसे फंसे कि करियर पर सही तरह से फोकस ना कर सके और इसी के चलते फिल्में चुनने में भी चूक हुई.

मेकर्स करने लगे इग्नोर, बंद कर दी फिल्में
पुरु को लेकर कहा जाता है कि जब उनकी पहली फिल्म फ्लॉप हुई तो मेकर्स ने पुरु के साथ काम करने से बचने का फैसला किया और वे फिल्में बनाने से भी इंकार कर दिया जिन्हें लेकर वादा किया जा चुका था. पुरु की वे फिल्में भी नहीं बन पाईं जो वे साइन कर चुके थे. इस तरह 1996 में पहली फिल्म के बाद दूसरी तक पहुंचते-पहुंचते चार साल लग गए. ये फिल्म थी हमारा दिल आपके पास है. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चली लेकिन इसमें हीरो पुरु नहीं बल्कि अनिल कपूर थे. पुरु को विलेन के रूप में काफी पसंद किया गया. इसके बाद वे मिशन कश्मीर, एलओसी कारगिल, वीर, उमराव जान, दुश्मनी जैसी फिल्मों में नजर आए.
खलती रही पिता की कमी
इस स्टारकिड ने 18 साल के करियर में महज 14 फिल्में कीं. इनमें से कुछ तो बंद भी हो गईं. पुरु ने अपने करियर और जिंदगी की सबसे बड़ी कमी पिता के ना होने को लेकर बहुत बड़ी बात कही थी. पुरु ने कहा, अगर पापा जिंदा होते तो मेरे हालात अलग होते. मैं फिल्म साइन करने से पहले उनसे सलाह लेता. मैं पूछता कि कौनसी फिल्म साइन करनी चाहिए. क्या मैंने सही फैसला लिया है या नहीं.
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