हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पावर शिफ्ट पर एआर रहमान की हालिया कमेंट ने विवाद का रूप ले लिया है. भारतीय संगीत में क्रिएटिविटी, कंट्रोल और कॉर्पोरेटाइजेशन के बारे में बातचीत होने लगी है. ऑस्कर विजेता संगीतकार ने बताया कि पिछले आठ सालों में उनके पास की कमी हो गई है. यह बदलाव उन्होंने फैसला लेने की शक्ति रखने वाले लोगों में बदलाव के कारण बताया है. रहमान ने कहा, "जो लोग क्रिएटिव नहीं हैं, उनके पास अब चीजों का फैसला करने की शक्ति है."
उन्होंने आगे कहा कि इस बदलाव में सांप्रदायिक रंग भी हो सकता है, हालांकि इसे कभी सीधे तौर पर जाहिर नहीं किया गया. "मुझे यह कानाफूसी के तौर पर पता चलता है कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने आगे बढ़कर अपने पांच कंपोजर को हायर कर लिया." रहमान साउथ से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आने और टिके रहने वाले पहले कंपोजर हैं. उन्होंने आगे कहा, मैंने इस पर जवाब दिया, 'अरे, यह बहुत अच्छा है, मेरे लिए आराम है, मैं अपने परिवार के साथ चिल कर सकता हूं."
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इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्गज गायक हरिहरन ने मौजूदा इकोसिस्टम को न तो काला और न ही सफेद बताया. उन्होंने कहा, "यह एक ग्रे एरिया है." "मैं सच में चाहता हूं कि ज़्यादा क्रिएटिव लोग हों, या कम से कम ऐसे लोग जो सच में संगीत को समझते हों, वे ये फैसले लें." हरिहरन ने इस बात पर जोर दिया कि संगीत के प्रति संवेदनशीलता व्यावसायिक विचारों से पहले आनी चाहिए. "आपको पहले क्रिएटिविटी के बारे में सोचना होगा और पैसे के बारे में बाद में. अगर आप कला की बात आने पर सिर्फ पैसे के बारे में सोचते हैं, तो कौन जानता है कि भविष्य कैसा होगा."
कंपोजर और गायक लेस्ली लुईस ने इस बात से सहमति जताई कि पावर शिफ्ट हुआ है, लेकिन उनका मानना है कि यह स्वाभाविक रूप से हुआ है. उन्होंने कहा, "म्यूजिक इंडस्ट्री में बदलाव आया है." "अब सिर्फ पुराने खिलाड़ी नहीं हैं. नए विचारों वाले नए लोग आए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने मापदंडों को पूरी तरह से बदल दिया है."
लुईस ने बताया कि YouTube और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म ने कलाकारों को अपने खुद के लेबल बनने की अनुमति दी है, जिससे आउटपुट बढ़ा है लेकिन साथ ही फैसले लेने की प्रक्रिया का कॉर्पोरेटाइजेशन भी हुआ है.
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उन्होंने समझाया, "पहले, जो लोग हमें जज करते थे, उनके पास अनुभव और क्रिएटिव सोच होती थी. आज, यह बहुत कॉर्पोरेट है. फैसला लेने वाला व्यक्ति अक्सर यह सुनिश्चित करता है कि उसकी नौकरी सुरक्षित रहे. वे संगीत से प्यार कर सकते हैं, लेकिन उनके पास हमेशा यह तय करने का अनुभव नहीं होता कि सही कलाकार कौन है."
ये दोनों संगीतकार मानते हैं कि कलाकारों के नेतृत्व वाली पहलों के माध्यम से बदलाव संभव है. यह विश्वास मुंबई में लॉन्च किए गए एक नए म्यूजिक प्लेटफॉर्म गूंगूनालो के साथ सामने आया. कलाकारों को उनके संगीत का मालिकाना हक देने के लिए डिज़ाइन किया गया यह प्लेटफॉर्म 100 ओरिजिनल ट्रैक के साथ लॉन्च हुआ और संगीतकारों, कंपोजर और गीतकारों को बराबर के हिस्सेदार के तौर पर सहयोग करने में सक्षम बनाता है.
जावेद अख्तर और शंकर महादेवन जैसे सम्मानित कलाकारों ने गूंगूनालो का स्वागत संगीत उद्योग में रचनात्मक स्वतंत्रता और सच्चे कलात्मक निवेश को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में किया है.
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