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शोले या जंजीर नहीं, इस फिल्म ने बदल दिया था बॉलीवुड का गेम, 15 घंटे तक कमरे में बंद रहे थे बिग बी

1975 में रिलीज हुई फिल्म दीवार सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं थी, बल्कि हिंदी सिनेमा का टर्निंग पॉइंट बनी. सलीम-जावेद की लिखी स्क्रिप्ट और अमिताभ बच्चन की दमदार परफॉर्मेंस ने “एंग्री यंग मैन” की इमेज को नई ऊंचाई दी. मंदिर वाला सीन और डायलॉग “आज खुश तो बहुत होगे तुम…” आज भी लोगों की जुबान पर है.

शोले या जंजीर नहीं, इस फिल्म ने बदल दिया था बॉलीवुड का गेम, 15 घंटे तक कमरे में बंद रहे थे बिग बी
अमिताभ बच्चन की 15 घंटे की तैयारी बनी मिसाल

1975 में आई फिल्म दीवार को आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे  बड़ी फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म के डायरेक्टर यश चोपड़ा थे और कहानी मशहूर जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर ने लिखी थी. यह कहानी दो भाइयों की थी. एक भाई पुलिस ऑफिसर बनता है और दूसरा क्राइम की दुनिया में चला जाता है. इससे पहले जंजीर में अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' के रूप में देखा गया था, लेकिन दीवार ने इस इमेज को और भी पक्का कर दिया. फिल्म में विजय के किरदार में गरीबी, सिस्टम से नाराज़गी और अंदर का गुस्सा साफ नजर आया. इस फिल्म में अमिताभ की आवाज, एक्टिंग और डायलॉग्स ने फिल्म को यादगार बना दिया.

मंदिर वाले सीन के लिए की 15 घंटे की तैयारी

फिल्म का सबसे फेमस सीन मंदिर वाला है. इसमें विजय भगवान में विश्वास नहीं करता और अपनी मां की जान बचाने के लिए मंदिर जाता है. 'कौन बनेगा करोड़पति' शो में अमिताभ बच्चन ने खुद बताया था कि इस सीन को शूट करने से पहले वह सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकले. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि एक ऐसा इंसान जो भगवान को नहीं मानता, वह कैसे प्रार्थना करेगा. डायलॉग की पहली लाइन “आज खुश तो बहुत होगे तुम…” थी. इस लाइन में गुस्सा और दर्द दोनों एक साथ नजर आया.

डायलॉग्स ने फिल्म को बनाया यादगार

फिल्म का एक और मशहूर डायलॉग 'मेरे पास मां है' आज भी लोगों की जबान पर रहता है. इस फिल्म के लिए सलीम-जावेद ने ऐसे डायलॉग लिखे जिन्होंने लोगों को तालियां बजाने और सोचने के लिए मजबूर कर दिया.  यही वजह है कि फिल्म रिलीज के 50 साल बाद भी इसके सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं.

अमिताभ बच्चन की मेहनत जो बन गई मिसाल

अमिताभ बच्चन उस समय शोले और दीवार की शूटिंग साथ-साथ कर रहे थे. वह सुबह एक फिल्म की शूटिंग करते थे और रात में दूसरी की.  उन्होंने मंदिर वाले सीन के लिए शीशे के सामने प्रैक्टिस की. क्लाइमेक्स में भी उन्होंने डबिंग से बचने की कोशिश की ताकि असली भाव चेहरे पर दिखें. अमिताभ की उसी मेहनत ने फिल्म को सफल बनाया.

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