गजल सम्राट जगजीत सिंह को दुनिया से विदा हुए आज दस साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी आवाज का जादू आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. उनकी गाई गजलें सिर्फ सुनी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं. ऐसी ही एक गजल है ‘चिट्ठी न कोई संदेश', जो आज भी सुनने वालों की आंखें नम कर देती है. बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने के पीछे जगजीत सिंह का निजी और गहरा दर्द छिपा था. जगजीत सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह का एक बेटा था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. एक दर्दनाक सड़क हादसे में उनके बेटे का निधन हो गया. इस घटना ने जगजीत सिंह को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया. बेटे की मौत का सदमा इतना गहरा था कि उन्होंने लंबे समय तक संगीत से दूरी बना ली. स्टेज पर आने और गाने का उनका मन ही नहीं करता था.
बेटे के निधन से टूट गई थीं चित्रा सिंह
इस हादसे के बाद उनकी पत्नी चित्रा सिंह भी टूट गईं और धीरे-धीरे संगीत की दुनिया से दूर होती चली गईं. वहीं, जगजीत सिंह ने वक्त के साथ खुद को संभालने की कोशिश की. उन्होंने दोबारा संगीत में वापसी की, लेकिन उनका अंदाज पहले से बिल्कुल अलग था. उनकी आवाज में पहले से कहीं ज्यादा दर्द, ठहराव और गहराई आ चुकी थी. फिल्म ‘दुश्मन' में गाया गया गाना ‘चिट्ठी न कोई संदेश' उनकी उसी टूटे हुए मन की आवाज माना जाता है. ऐसा लगता है जैसे इस गाने के जरिए जगजीत सिंह ने अपने बेटे से बात करने की कोशिश की हो.
ये था वो इमोशनल गाना
गाने के बोल थे, “चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन-सा देश, जहां तुम चले गए…”.इन अमर पंक्तियों को गीतकार आनंद बख्शी ने लिखा था, जिन्होंने शब्दों के जरिए दर्द को हमेशा के लिए कैद कर दिया. जगजीत सिंह की मखमली आवाज़ और इन भावुक बोलों ने इस गाने को बॉलीवुड के सबसे यादगार सेड सॉन्ग्स में शामिल कर दिया. आज भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता सिर्फ एक गीत नहीं सुनते, बल्कि एक पिता का टूटा हुआ दिल महसूस करते हैं. यही वजह है कि जगजीत सिंह भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी आवाज और उनका दर्द हमेशा अमर रहेगा.
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