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दस लाख का वो गाना, हर चौराहे और नुक्कड़ पर खूब देता था सुनाई, लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी का गीत बना मजलूमों की आवाज

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत बने हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया बल्कि समाज की भावनाओं को भी अपनी आवाज दी. 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘दस लाख' का गीत ‘गरीबों की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा' ऐसा ही एक कालजयी भजन माना जाता है.

दस लाख का वो गाना, हर चौराहे और नुक्कड़ पर खूब देता था सुनाई, लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी का गीत बना मजलूमों की आवाज
दस लाख फिल्म का यह गाना है सुपरहिट, बना मजलूमों की आवाज
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हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत बने हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया बल्कि समाज की भावनाओं को भी अपनी आवाज दी. 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘दस लाख' का गीत ‘गरीबों की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा' ऐसा ही एक कालजयी भजन माना जाता है. उस दौर में यह गीत मंदिरों, धार्मिक आयोजनों, लाउडस्पीकरों, चौराहों और गांव-कस्बों तक हर जगह सुनाई देता था. मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की सुरीली आवाज में सजे इस गीत ने आम लोगों के दिलों में ऐसी जगह बनाई कि छह दशक बाद भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है. यही वजह है कि यह गीत आज भी पुराने संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल रहता है.

गरीबों की आवाज बन गया था यह गीत

फिल्म ‘दस लाख' का यह गीत अपने बोल और भावनात्मक संदेश की वजह से लोगों के दिलों तक पहुंचा. ‘गरीबों की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा, तुम एक पैसा दोगे, वो दस लाख देगा' जैसी पंक्तियों ने इसे केवल एक फिल्मी गीत नहीं रहने दिया, बल्कि यह आस्था और इंसानियत का संदेश देने वाला भजन बन गया. गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत मशहूर संगीतकार रवि ने तैयार किया था. रफी और लता की आवाज ने इस रचना में ऐसी आत्मीयता भर दी कि यह हर वर्ग के लोगों की जुबान पर चढ़ गया. उस समय धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में भी यह गीत खूब बजाया जाता था.

यहां देखें दस लाख का पूरा गाना

1966 की फिल्म ‘दस लाख' की खास पहचान बना यह भजन

फिल्म ‘दस लाख' का निर्देशन आर.सी. तलवार ने किया था. फिल्म में संजय खान, बबीता और ओम प्रकाश जैसे कलाकार नजर आए थे. हालांकि फिल्म को जितनी पहचान मिली, उसमें इस भजन का बड़ा योगदान माना जाता है. समय के साथ कई नए भजन और भक्ति गीत आए, लेकिन ‘गरीबों की सुनो' की लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई. आज भी रेडियो, पुराने फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह गीत अक्सर सुनाई देता है. यही कारण है कि करीब 60 साल बाद भी यह भजन हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार और लोकप्रिय भक्ति गीतों में अपनी खास जगह बनाए हुए है.

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