आज भले ही टीवी पर सैकड़ों चैनल और मोबाइल पर हजारों वीडियो मौजूद हों. लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब पूरे देश का एंटरटेनमेंट सिर्फ आधे घंटे के एक कार्यक्रम पर टिक जाता था. दिलचस्प बात ये भी है कि ये शो न तो रामायण था न महाभारत था. आज के दौर में दर्जनों ऐसे प्लेटफॉर्म हैं. जहां आप अपने मनपसंद गाने सुन सकते हैं. लेकिन दूरदर्शन के इस शो पर गाने सुनने का एक अलग ही मजा था. शो का छह दिन लंबा इंतजार और उसके बाद ये सस्पेंस कि आज कौन सा गाना सुनने को मिलेगा. उसकी बात ही कुछ और हुआ करती थी. शो की खातिर लोग अपने सारे काम निपटाकर टीवी के सामने बैठ जाते और अगले 30 मिनट तक घर में सिर्फ फिल्मी गीतों की आवाज घर घर में गूंजती थी.
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जब पूरे देश की धड़कन बन गया था शो
ये शो था दूरदर्शन का 'चित्रहार', जो रामायण और महाभारत से पहले ही लोगों के दिलों पर राज करने लगा था. जैसे ही चित्रहार शुरू होता. गांव की चौपाल से लेकर शहर की गलियां तक सूनी हो जाती थीं. चित्रहार दूरदर्शन का फिल्मी गीतों पर बेस्ड कार्यक्रम था. जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई और देखते ही देखते ये भारत का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला टीवी शो बन गया. इसकी पॉपुलेरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके दर्शकों की संख्या करीब 15 करोड़ तक पहुंच गई थी.
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
— Doordarshan National दूरदर्शन नेशनल (@DDNational) May 16, 2019
इन आँखों से वाबस्ता अफ़साने हज़ारों हैं...
Musician #Khayyam special #Chitrahaar - Friday at 10 pm and Monday morning at 9:30 am on @DDNational pic.twitter.com/Gf7bFVCfIv
उस समय टीवी पर न तो दर्जनों म्यूजिक चैनल थे और न ही इंटरनेट. ऐसे में लोग पूरे हफ्ते इंतजार करते थे कि चित्रहार कब आएगा और वो अपने पसंदीदा फिल्मी गाने देख पाएंगे. कई बार पुराने या बार-बार दिखाए जाने वाले गीत भी आते थे. लेकिन दर्शकों का एक्साइटमेंट कम नहीं होता था.
आज चैनल ज्यादा हैं, लेकिन वैसी खुशी नहीं
इस शो की पॉपुलैरिटी को देखते हुए अगस्त 2002 में भारत सरकार ने चित्रहार में सेम लैंग्वेज सबटाइटलिंग (SLS) की सुविधा भी शुरू की. माना गया कि इससे करीब 8 से 10 करोड़ लोगों को पढ़ने की एक्यूरेसी और स्पीड में भी सुधार लाने में मदद मिली थी. शुरुआत में चित्रहार का प्रसारण हफ्ते में सिर्फ एक ही दिन हुआ करता था. लेकिन बाद में इसकी पॉपुलैरिटी को देखते हुए चित्रहार हफ्ते में दो बार दूरदर्शन पर आने लगा. ये दो दिन थे बुधवार और शुक्रवार. चित्रहार के अलावा हर रविवार को रंगोली नाम का एक शो भी टेलीकास्ट होता था. रंगोली में एक एंकर पहले गाने के बारे में चंद लाइन कहा करती थी फिर गाने आया करते थे. पॉपुलैरिटी के मामले में रंगोली भी लोगों की पसंद बना हुआ था.
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