फिल्म 'सतलुज' के लिए चुनौतियों का दौर समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले तीन वर्षों से सेंसर बोर्ड के साथ चले लंबे कानूनी और प्रशासनिक विवादों के बाद, जब यह फिल्म आखिरकार 3 जुलाई को 'ज़ी 5' (Zee5) पर रिलीज हुई, तो कलाकारों और दर्शकों को उम्मीद थी कि अब फिल्म निर्बाध रूप से दर्शकों तक पहुंच सकेगी. हालांकि, यह राहत भरी शुरुआत बेहद कम समय तक ही सीमित रही. रिलीज के महज तीन दिन बाद ही भारत में इस फिल्म को 'ज़ी 5' के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था.
भारत में स्ट्रीमिंग रुकते ही फिल्म के प्रति दर्शकों का समर्थन एक अलग रूप में सामने आया. फिल्म से जुड़े कलाकारों ने पुष्टि की है कि जैसे ही भारत में इसे प्लेटफॉर्म से हटाया गया, उसके तुरंत बाद ही पंजाब के विभिन्न गांवों में लोगों ने प्रोजेक्टर के जरिए इस फिल्म को दिखाना शुरू कर दिया. यह एक तरह का जमीनी विरोध और समर्थन दोनों था, जहां दर्शक डिजिटल पाबंदियों के बावजूद फिल्म को देखना चाहते थे.
अब ताजा घटनाक्रम के अनुसार, 10 जुलाई की शाम को 'ज़ी 5' ने इसे अपने अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से भी पूरी तरह हटा दिया है. इस कदम के साथ ही अब विदेशी दर्शक भी आधिकारिक तौर पर 'सतलुज' को नहीं देख पाएंगे. तीन साल तक फिल्म के अटके रहने के बाद जब यह रिलीज हुई थी, तो पूरी टीम उत्साहित थी कि अब इसे व्यापक दर्शक वर्ग मिल सकेगा. लेकिन 10 जुलाई की शाम को अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है. अब आधिकारिक तौर पर यह फिल्म कहीं भी उपलब्ध नहीं है.
फिलहाल, इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है कि इतनी जल्दी फिल्म को प्लेटफॉर्म से क्यों हटाया गया है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या फिल्म को किसी अन्य माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, या फिर पंजाब के गाँवों में हो रही ये अनौपचारिक स्क्रीनिंग ही इस फिल्म को देखने का एकमात्र जरिया बनी रहेगी.
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