लेजेंड्री स्टार धर्मेंद्र हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की एक ऐसी शख्सियत हैं जिसका मुरीद हर कोई रहा. जिन्होंने साथ काम किया जिन्होंने नहीं किया, जो कभी मिले या जिन्हें कभी मुलाकात का मौका तक नसीब नहीं हुआ कोई भी धरम जी के जादू से अछूता नहीं रहा. ऐसे में साथ काम करने वालों का तो पूछिए ही मत. उनके पास धरम पाजी से जुड़े ऐसे कई किस्से हैं जो आज चेहर पर मुस्कान ला देते हैं. मौसमी चटर्जी को ही लीजिए उन्होंने धर्मेंद्र से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताया था जिससे पता चलता है कि वह अपने परिवार के लिए कितना सोचते थे. खासकर अपने बच्चों के लिए तो कुछ भी करने को तैयार रहते थे.
मौसमी चटर्जी ने कहा, मुझे याद है कि उनके बेटे सनी देओल और पहलाज निहलानी और शायद राज संतोषी मुझे घायल (1990) के लिए साइन करने आए थे, लेकिन बातचीत नहीं बनी क्योंकि वे मुझे कम पैसे देने की सोच रहे थे. मुझे याद है कि पहलाज परेशान हो गए थे. मुझे लगता है कि उनके ईगो को चोट लगी थी.
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मौसमी चटर्जी ने बताया, तीसरे दिन धरम जी घर आए और कहा, 'मैं यह अपने बेटे के लिए कर रहा हूं. कोई भी हीरोइन तुम्हारी तरह मासूम नहीं दिखती...कि कोई तुम्हारे साथ बुरा बर्ताव होते देखकर "घायल" हो जाए.'
मौसमी चटर्जी ने कहा, 'मुझे याद है कि धरम जी को घर पर देखकर मेरी मेड लगभग शॉक से मर ही गई थी, क्योंकि हमारे घर में 'फिल्मी' माहौल नहीं है. उनकी अच्छाई ने मुझे हैरान कर दिया क्योंकि वह अपने बेटे के लिए आए थे. उन्होंने यह भी पक्का किया कि जहां तक मेरी फीस का सवाल है, मुझे कोई नुकसान न हो.'
बॉलीवुड एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी ने कहा, मुझे याद है कि मैंने उनसे बुरी तरह शिकायत की थी कि घायल सिल्वर जुबली फंक्शन में फिल्म में काम करने वाले मेरे अलावा सभी को ट्रॉफी दी गई थी. वह पूरी तरह से निराश हो गए थे.
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