कवि प्रदीप का लिखा अमर गीत "ए मेरे वतन के लोगों..." को भारत रत्न लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. आज भी गणतंत्र दिवस और आजादी के जश्न में ये गीत बजाया जाता है. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी इस गाने को सुनकर रो पड़े थे.कवि प्रदीप की बेटी मितुल प्रदीप ने एनडीटीवी को बताया कि ये गाना लता मंगेशकर से पहले दिवंगत आशा भोसले से गवाया जाने वाला था. दोनों बहनों में इस गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त तकरार भी हो गई थी.
आशा भोसले का नाम था तय
मितुल के मुताबिक जब उनके पिता ने ये गाना लिखा तो वे संगीतकार सी.रामचंद्र, जिन्हें चितलकर काका भी कहा जाता था, के पास गए और इसे संगीबद्ध करने के लिए कहा. पंडित प्रदीप चाहते थे कि वे गाना लता मंगेशकर से गवाएं. पर चितलकर काका ने कहा कि मंगेशकर से उनका मनमुटाव चल रहा है इसलिए वो ये गाना नहीं गाएंगी. इस वजह से तय हुआ कि उनकी बहन आशा भोसले से गाना गवाया जाए.
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मुश्किलों से गाने के लिए मानीं लता मंगेशकर
आशा भोसले से गाने की रिहर्सल कराई गई लेकिन पंडित प्रदीप को लगा कि इस गाने के लिए लता मंगेशकर की आवाज ही उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि वे मंगेशकर को गाने के लिए मना लेंगे. पंडित प्रदीप ने मंगेशकर से मुलाकात की जिसके बाद बड़ी मुश्किल से मंगेशकर उनके अनुरोध पर गाने के लिए तैयार हो गईं.
आशा भोसले ने रोते रोते स्टूडियो छोड़ दिया
संगीतकार के सामने अब समस्या ये हो गई कि उन्होंने आशा भोसले से भी रिहर्सल करवा ली थी. अब उनको मना करना ठीक नहीं लगता. तय हुआ कि गाना दोनों बहनें गाएंगी. आशा भोसले इसके लिए तैयार हो गईं. रिकॉर्डिंग वाले दिन दोनों बहनें स्टूडियो पहुंचीं. गाना रिकॉर्ड करने के पहले बंद कमरे में दोनों बहनों के बीच कुछ मिनट तक बातचीत ही जिसके बाद आशा भोसले रोते रोते स्टूडियो से घर चलीं गईं. इसके बाद गाना लता मंगेशकर ने गाया. दोनों के बीच किस बात को लेकर तकरार हुई ये आज तक सस्पेंस है.
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