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आशा भोसले के पांव में था इतना दर्द खड़ा होना हुआ मुश्किल, सोनू निगम ने दबाए थे पांव

12 अप्रैल को आशा भोसले ने इस दुनिया को अलविदा कहा. उनके जाने के बाद से उनके फैन्स इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं. उनके चाहने वालों में एक सोनू निगम भी थे जो उन्हें अपनी मां से कम नहीं समझते थे.

आशा भोसले के पांव में था इतना दर्द खड़ा होना हुआ मुश्किल, सोनू निगम ने दबाए थे पांव
आशा भोसले को याद कर भावुक हुए सोनू निगम
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा को सदाबहार गानों से नवाजने वाली दिग्गज सिंगर आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल को हो चुका है, और हाल ही में सिंगर के बेटे और पोती जनाई को गंगा में उनकी अस्थियां विसर्जित करते हुए देखा गया. सिंगर के निधन से हर कोई स्तब्ध है और आज भी अपने-अपने अनुभव शेयर कर रहा है. अब सिंगर सोनू निगम ने सिंगर के साथ बिताए उस किस्से को शेयर किया, जहां उन्होंने पहली बार आशा भोसले के साथ स्टेज शेयर किया था.

सिंगर सोनू निगम ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया है जिसमें आशा भोसले से जुड़ी कई किस्सों को जिक्र कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनका पहला शो आशा जी के साथ एक बिजनेसमैन के बेटे की शादी के दौरान हुआ था. सिंगर ने कहा, उस वक्त आशा जी का गला खराब था और उन्होंने मुझसे कहा कि क्या मेरे साथ गाओगे. उस वक्त सिंगर हैरान हो गए थे क्योंकि इतने बड़े सिंगर के साथ एक ही स्टेज पर आना किसी के लिए भी सौभाग्य की बात होगी.

सोनू ने बताया, उस वक्त आशा जी का गला बहुत खराब था, लेकिन फिर भी उन्होंने बहुत अच्छे से 'झूठे नैना बोले सांची बतियां' गाना पूरे सुर में गाया था और मेरे गाने की जरूरत नहीं पड़ी. उस वक्त गला खराब होने के बाद भी गायिकी में उनकी लगन को देखकर मैं बहुत प्रेरित हुआ था, जिसके बाद हम लोगों ने साथ में विदेश में भी एक शो किया था. तब स्टेज पर आशा जी के पैरों में किसी परेशानी की वजह से दर्द हो रहा था और वे ठीक से खड़ी भी नहीं हो रही थी. ऐसे में मैंने बैकस्टेज जाकर उनके पैर दबाए और वे बिल्कुल ठीक हो गई थी. बता दें कि पैर की जिस परेशानी से आशा भोसले जूझ रही थी, उसी परेशानी से सोनू निगम की मां भी पीड़ित थी, ऐसे में सोनू को पैर ठीक करना आता था.

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सिंगर ने बताया कि पैर दबाने का किस्सा उन्हें काफी लंबे समय तक याद रहा था और वे बार-बार उस बात का जिक्र करती थीं. उन्होंने खुद अपने हाथों से बनाकर हमें दाल और चावल भी खिलाए थे. सिंगर का कहना है कि आशा जैसी बड़ी विभूति को याद कर गम नहीं मनाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह से जिया है और बहुत खूबसूरत तरीके से जिया है.
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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