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उमराव जान का वो गाना, जिसमें रेखा की खूबसूरती और आशा भोसले की आवाज ने लगाए चार-चांद, 45 साल बाद भी बना हुआ है लोगों का फेवरेट

जब उमराव जान का गाना इन आंखों की मस्ती पूरा हुआ और आशा भोसले ने उसे सुना, तो वह खुद भावुक हो गईं. उन्होंने कुछ पल के लिए आंखें बंद कर लिया और चुप रहीं. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह गाना उनकी ही आवाज में है. उ

उमराव जान का वो गाना, जिसमें रेखा की खूबसूरती और आशा भोसले की आवाज ने लगाए चार-चांद, 45 साल बाद भी बना हुआ है लोगों का फेवरेट
रेखा और आशा का गाना 45 साल बाद भी बना हुआ है लोगों का फेवरेट
नई दिल्ली:

भारतीय संगीत जगत में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो हमेशा के लिए यादगार बन जाती है. दिवंगत गायिका आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में हजारों गानों को आवाज दी, लेकिन कुछ गाने ऐसे रहे, जिन्होंने उन्हें खुद भी हैरान कर दिया. ऐसा ही एक किस्सा फिल्म 'उमराव जान' के मशहूर गीत 'इन आंखों की मस्ती' से जुड़ा है, जिसमें एक समय ऐसा आया, जब आशा भोसले ने खुद संगीतकार से बेटे की कसम तक दिलवा दी.

यह कहानी उस दौर की है, जब रेखा स्टारर फिल्म 'उमराव जान' बन रही थी. इस फिल्म का निर्देशन मुजफ्फर अली ने किया था और संगीत की जिम्मेदारी मशहूर संगीतकार खय्याम ने संभाली थी. फिल्म की कहानी नजाकत से भरी थी, इसलिए इसके गानों में भी खास तरह की आवाज और एहसास की जरूरत थी. ऐसे में खय्याम की पत्नी जगजीत कौर ने सुझाव दिया कि फिल्म के लिए सबसे सही आवाज आशा भोसले की होगी.

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उस समय आशा भोसले काफी व्यस्त रहती थीं और एक दिन में कई गाने रिकॉर्ड करती थीं. जब खय्याम उनके पास 'इन आंखों की मस्ती' लेकर पहुंचे, तो उन्होंने पहले ही साफ कर दिया कि यह गाना आसान नहीं है और इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी. आशा जी ने तुरंत हामी भर दी, लेकिन उन्होंने रिहर्सल के लिए कुछ समय मांगा. दिलचस्प बात तब सामने आई जब खय्याम ने आशा भोसले से कहा कि उन्हें इस गाने में आशा की आवाज नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें 'उमराव जान' की आवाज चाहिए। यह सुनकर आशा हैरान रह गईं. 

उन्होंने पूछा, ''आखिर मैं कैसे ये कर सकती हूं?'' तब, खय्याम ने खुद गाकर उन्हें समझाया कि उन्हें किस तरह की नर्म और गहराई भरी आवाज चाहिए. इस पर आशा ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें कुछ और दिन प्रैक्टिस के लिए दिए जाएं.

जब रिकॉर्डिंग का समय आया, तब असली चुनौती सामने आई. खय्याम ने इस गाने को बहुत धीमे और अलग सुर में तैयार किया था, जो आशा भोसले की आमतौर पर ऊंची आवाज से बिल्कुल अलग था. जब उन्होंने गाना सुना, तो वह थोड़ी परेशान हो गईं और उन्हें लगा कि वह इस अंदाज में गा नहीं पाएंगी. उन्होंने खय्याम से कहा कि यह सुर उनके लिए नया है और वह इसमें सहज महसूस नहीं कर रही हैं.

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इसी दौरान बातचीत में वह पल भी आया, जिसने इस किस्से को खास बना दिया. खय्याम ने एक तरीका निकाला. उन्होंने कहा कि आशा जी गाना दो तरह से गाएं, एक अपने अंदाज में और दूसरा 'उमराव जान' के किरदार के हिसाब से. बाद में दोनों में से जो बेहतर लगेगा, उसे चुना जाएगा. आशा भोसले ने कहा कि अगर ऐसा है तो वह अपने बेटे की कसम खाएं कि गाने में वही किया जाएगा, जो तय हुआ है.

जब गाना पूरा हुआ और आशा भोसले ने उसे सुना, तो वह खुद भावुक हो गईं. उन्होंने कुछ पल के लिए आंखें बंद कर लिया और चुप रहीं. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह गाना उनकी ही आवाज में है. उन्होंने माना कि उन्होंने पहले कभी इस तरह नहीं गाया था. यही वजह है कि 'इन आंखों की मस्ती' आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसा हुआ है.
 

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