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म्यूजिक इंडस्ट्री में बड़ा उलटफेर! ‘गुनगुनालो’ ने बदले खेल के नियम, अब गानों के असली मालिक होंगे कलाकार

भारतीय संगीत की दुनिया में गुनगुनालो नाम से एक नया म्यूजिक प्लेटफॉर्म शुरू हुआ है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां संगीत बनाने वाले कलाकार ही उसके असली मालिक हैं.

म्यूजिक इंडस्ट्री में बड़ा उलटफेर! ‘गुनगुनालो’ ने बदले खेल के नियम, अब गानों के असली मालिक होंगे कलाकार
गुनगुनालो ने बदले खेल के नियम, अब गानों के असली मालिक होंगे कलाकार

भारतीय संगीत की दुनिया में गुनगुनालो नाम से एक नया म्यूजिक प्लेटफॉर्म शुरू हुआ है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां संगीत बनाने वाले कलाकार ही उसके असली मालिक हैं. यह मंच गाने बनाने, रिलीज करने और उससे होने वाली कमाई के पुराने तरीकों को बदलने की कोशिश कर रहा है. गुनगुनालो ने शुरुआत के साथ ही 100 नए ओरिजिनल गाने एक साथ रिलीज किए हैं. आमतौर पर एक इंडिपेंडेंट गाने को रिलीज होने में काफी वक्त लग जाता है, लेकिन गुनगुनालो ने पहले ही दिन इतना बड़ा कदम उठाकर सबका ध्यान खींचा है.

इस प्लेटफॉर्म पर गायक, संगीतकार, गीतकार और प्रोड्यूसर बराबरी के स्तर पर मिलकर काम करते हैं. यहां न कोई फीस ली जाती है और न ही किसी एक का दबदबा होता है. जो भी गाना बनता है, उसका कॉपीराइट पूरी तरह कलाकारों के पास रहता है. यानी न अधिकार किसी को सौंपने की मजबूरी और न ही कोई छुपी हुई शर्त. गुनगुनालो का कमाई का मॉडल भी साफ और सीधा है. प्लेटफॉर्म से होने वाली 60 प्रतिशत से ज़्यादा कमाई सीधे कलाकारों को मिलती है. कलाकार खुद देख सकते हैं कि उनका गाना कितना सुना जा रहा है और उससे उन्हें क्या फायदा हो रहा है. रॉयल्टी किसी उलझे हुए सिस्टम में नहीं जाती, सब कुछ सामने होता है.

यह मंच कलाकार और श्रोता के रिश्ते को भी करीब लाने की कोशिश करता है. यहां गाना रिलीज करके छोड़ नहीं दिया जाता, बल्कि कलाकार अपने श्रोताओं से सीधे जुड़ सकते हैं, उनसे बात कर सकते हैं और उनकी प्रतिक्रिया तुरंत जान सकते हैं. इससे सुनने वाले सिर्फ दर्शक नहीं रहते, बल्कि एक तरह से संगीत की यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. गुनगुनालो पर हर तरह का संगीत सुनने को मिलता है- शास्त्रीय, लोक, इंडी पॉप, फ्यूजन, गजल और स्पोकन वर्ड तक. अलग-अलग भाषाओं और पीढ़ियों के कलाकार यहां बिना किसी व्यापारिक दबाव के अपनी बात रख पा रहे हैं.

इस मंच से जुड़े कई बड़े नाम भी इसकी सोच का समर्थन कर रहे हैं. इनमें जावेद अख़्तर, हरिहरन, शंकर महादेवन, प्रसून जोशी, श्रेया घोषाल, शान, समीर अंजन, पापोन (अंगराग महंता), ललित पंडित, आकृति कक्कड़, विजय प्रकाश, आनंद श्रीवास्तव, मिलिंद श्रीवास्तव, सिद्धार्थ महादेवन और शिवम महादेवन शामिल हैं. गुनगुनालो के सह-संस्थापक श्रीधर रंगनाथन का कहना है कि यह मंच कलाकार और श्रोता के बीच फिर से अपनापन लाने की कोशिश है, ताकि संगीत सिर्फ़ आंकड़ों तक सीमित न रहे.

वहीं, गुनगुनालो की सीईओ शर्ली सिंह के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म कलाकारों की बरसों की परेशानियों और अनुभवों को समझकर बनाया गया है. पारदर्शिता, बराबरी और सीधा जुड़ाव यही इसकी असली ताकत है. कुल मिलाकर, गुनगुनालो को एक ऐसे मंच के तौर पर देखा जा रहा है, जो कलाकारों को केंद्र में रखकर संगीत की दुनिया को आगे बढ़ाना चाहता है. यहां मुकाबले से ज़्यादा सहयोग को अहमियत दी जाती है और संगीत को कारोबार नहीं, जुनून की तरह देखा जाता है.

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