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अमित कुमार का 45 साल पुराना आइकॉनिक गाना, पापा किशोर कुमार को हराकर जीता था बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड

अमित कुमार 80 के दशक की सिग्नेचर आवाज बने थे. लेकिन क्या आप उस गाने के बारे में जानते हैं, जिसे गाकर उन्होंने किशोर कुमार को हराकर बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड जीता. 

अमित कुमार का 45 साल पुराना आइकॉनिक गाना, पापा किशोर कुमार को हराकर जीता था बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड
अमित कुमार ने पापा किशोर कुमार को इस गाने से जीता दिल
नई दिल्ली:

यह बात साल 1975 की है. बंबई के एक छोटे से म्यूजिक रूम में 23 साल का एक नौजवान बेहद घबराया हुआ खड़ा था. उसके ठीक सामने आरडी बर्मन (पंचम दा) बैठे थे और उनके बगल में मन्ना डे तथा किशोर कुमार जैसे महानायक थे. आरडी बर्मन के कहने पर उस नौजवान ने बेहद संकोच और थरथराती आवाज में एक गीत सुनाया. वह नौजवान कोई और नहीं बल्कि किशोर कुमार के बड़े बेटे अमित कुमार थे. 3 जुलाई 1952 को कलकत्ता में जन्मे अमित कुमार को संगीत और अभिनय विरासत में मिला था. उनके पिता किशोर कुमार और मां रूमा गुहा ठाकुरता (प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री और 'कलकत्ता यूथ चायर' की संस्थापक) थीं. उनके परिवार का नाता फिल्म जगत की दिग्गज हस्तियों से रहा है, जिसमें उनकी सौतेली माताओं में मधुबाला, योगिता बाली और लीना चंदावरकर शामिल थीं जबकि अभिनेत्री काजोल उनकी भतीजी हैं. 

11 साल की उम्र में गाया पहला गाना

अमित कुमार का शुरुआती बचपन कोलकाता में बीता, जहां वे दुर्गा पूजा उत्सवों में गाते थे. ऐसे ही एक कार्यक्रम में महान बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार ने उनकी प्रतिभा को सराहा. जब मां ने शिकायत की कि अमित केवल 'फिल्मी' गाने गाता है, तो किशोर कुमार उन्हें बंबई ले आए. बंबई आने से पहले ही उन्होंने अपने पिता की निर्देशित फिल्म 'दूर गगन की छांव में' (1964) में अभिनय किया था और फिल्म 'दूर का राही' (1971) के लिए 11 साल की उम्र में अपना पहला गीत "मैं पंछी मतवाला रे" रिकॉर्ड किया था. 

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इस गाने के कारण बने रातों रात स्टार

साल 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म 'लव स्टोरी' के गाने "याद आ रही है" ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया. इस सफलता का सबसे ऐतिहासिक क्षण साल 1982 के फिल्मफेयर अवार्ड्स में आया. बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर की श्रेणी में पिता किशोर कुमार और बेटे अमित कुमार आमने-सामने थे. कड़े मुकाबले के बाद विजेता अमित कुमार घोषित हुए और किशोर कुमार ने गर्व से अपने बेटे को गले लगा लिया. 1980 के दशक में वे कुमार गौरव, अनिल कपूर और संजय दत्त जैसे युवा कलाकारों की सिग्नेचर आवाज बन गए. 

अमित कुमार के पॉपुलर गाने 

अमित कुमार के करियर के प्रमुख गीतों की बात करें, तो 'बड़े अच्छे लगते हैं', 'तेरी याद आ रही है', 'एक दो तीन', 'रोज रोज आंखों तले', 'उठे सबके कदम', 'तू रूठा तो मैं मान जाऊंगा', 'तिरछी टोपीवाले', और 'टिप टिप टिप टिप बारिश' जैसे गीत शामिल हैं. 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार के आकस्मिक निधन ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को स्तब्ध कर दिया. इसके बाद अमित कुमार ने अपने पिता की अधूरी फिल्म 'ममता की छांव में' (1989) का निर्देशन संभाला और उसे पूरा किया. इसके बाद 4 जनवरी 1994 को उनके मार्गदर्शक आरडी बर्मन भी दुनिया से चले गए. उन्होंने 1990 के मध्य में प्लेबैक सिंगिंग छोड़ दी. उन्होंने अपनी संगीत कंपनी 'कुमार ब्रदर्स म्यूजिक' शुरू की और खुद को स्वतंत्र संगीत तथा विश्वव्यापी लाइव कॉन्सर्ट्स के लिए समर्पित कर दिया.  

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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