बॉलीवुड में फिल्म सेट पर स्टारडम के आधार पर भेदभाव कोई नई बात नहीं है. ऐसा पहले भी सुनने को मिलता था और अब भी ऐसे किस्से गाहे बगाहे सामने आ ही जाते हैं. सीनियर एक्टर गोविंद नामदेव ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस सच्चाई को बेनकाब किया है. उन्होंने बताया कि यहां सिर्फ पेमेंट में ही अंतर नहीं होता बल्कि बर्ताव, सुविधाओं और यहां तक कि खान-पान में भी साफ साफ फर्क देखने को मिलता है. ये बातें सोचने पर मजबूर करती हैं.
गोविंद नामदेव ने कहा कि बड़े सितारे अक्सर छोटे या सपोर्टिंग कलाकारों से सलाह-मशविरा लेने से बचते हैं. उन्हें डर होता है कि ऐसा करने से उनकी इमेज कमजोर पड़ सकती है या लोग उन्हें कमतर समझ सकते हैं. वे खुद को सबसे ऊंचे लेवल पर मानते हैं, इसलिए दूसरों की राय की जरूरत महसूस नहीं करते. अगर कभी कोई सवाल पूछना भी हो तो वह केवल अपने बराबर वाले सितारों से ही करते हैं.
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लाइव हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने बॉलीवुड के इस हाइरैरिकी वाले ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि फीस के आधार पर ही सब कुछ तय होता है. ज्यादा कमाई वाले सितारों को बड़ी वैनिटी वैन, बेहतर सुविधाएं और स्पेशल ट्रीटमेंट मिलता है. यह भेदभाव खान-पान तक पहुंच जाता है. टॉप सितारों के लिए अलग से शानदार खाना तैयार किया जाता है, जबकि बाकी कलाकारों और क्रू सदस्यों के लिए अलग और सिम्पल खाना होता है.
हालांकि, गोविंद ने एक पॉजिटिव एगजाम्पल भी दिया. फिल्म ‘ओह माय गॉड' की शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार और डायरेक्टर उमेश शुक्ला ने तय किया था कि सेट पर सभी के साथ समान व्यवहार होगा. खाने का इंतजाम भी एक समान रखा गया. सबके लिए एक ही तरह का खाना. अगर किसी की पर्सनल चॉइस या धार्मिक वजह से कोई खास जरूरत हो (जैसे प्याज-लहसुन से परहेज), तो उसका अलग इंतजाम होता था, लेकिन कोई भेदभाव नहीं था. गोविंद के मुताबिक उस दौरान सेट का माहौल बेहद पॉजिटिव और एकजुटता वाला था.
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