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हक ही नहीं, मिथुन चक्रवर्ती की 'रिवाज' में भी दिखाया गया है तीन तलाक का दर्द, एक महिला का संघर्ष देख कर आपकी भी आंखों में आ जाएंगे आंसू

फिल्म रिवाज एक सेंसिटिव और गंभीर सामाजिक मुद्दे को उठाती है. यह कहानी है ज़ैनब नाम की एक औरत की, जिसे उसका पति स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक दे देता है. फिल्म औरत के संघर्ष, कानून की लड़ाई और समाज की सच्चाई को सामने लाती है.

हक ही नहीं, मिथुन चक्रवर्ती की 'रिवाज' में भी दिखाया गया है तीन तलाक का दर्द, एक महिला का संघर्ष देख कर आपकी भी आंखों में आ जाएंगे आंसू
तीन तलाक की कड़वी सच्चाई को दिखाती है 2025 में आई ये फिल्म
नई दिल्ली:

तीन तलाक समाज की एक कड़वी सच्चाई रही है, जिसे फिल्म 'रिवाज' बेहद संवेदनशील तरीके से सामने लाती है. यह वह प्रथा है जिसमें एक खत, एक मैसेज या एक शब्द के जरिए औरत की पूरी दुनिया उजाड़ दी जाती थी. फिल्म रिवाज की ज़ैनब भी इसी तीन तलाक का शिकार बनती है, जब उसे स्पीड पोस्ट से तलाक का नोटिस मिलता है. यह फिल्म तीन तलाक के दर्द, अपमान और उस मानसिक टूटन को दिखाती है, जिससे एक औरत गुजरती है. इस फिल्म में जैनब के पति का रोल आफताब शिवदासानी ने निभाया है. आइए जानते हैं इस फिल्म के बारे में -

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जैनब के संघर्ष की कहानी (Rivaj Movie Story)
फिल्म रिवाज की कहानी  जैनब   (मायरा सरीन) से शुरू होती है, जो एक साहसी लेकिन मजबूर औरत है. उसकी शादी समाज के दबाव में होती है, लेकिन यह शादी जल्द ही उसके लिए एक बुरा सपना बन जाती है. उसका पति हनीफ (आफताब शिवदासानी) और ससुराल वाले उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं.

ज़ैनब दिन-रात घर के कामों में उलझी रहती है और हर दर्द को चुपचाप सहती रहती है. हालात इतने खराब हो जाते हैं कि ससुराल वाले उसे चोरी-छिपे अबॉर्शन के लिए भी मजबूर करते हैं. जब  जैनब  टूट जाती है, तो वह अपने माता-पिता के घर जाने का फैसला करती है, लेकिन उसे अंदाजा भी नहीं होता कि उसके पीछे क्या होने वाला है.

जब खत से टूटा रिश्ता

जैनब  के घर छोड़ते ही उसका पति हनीफ उसे स्पीड पोस्ट के जरिए तीन तलाक का नोटिस भेज देता है. एक खत के साथ सालों का रिश्ता खत्म कर दिया जाता है. इस तलाक के बाद ज़ैनब अकेली पड़ जाती है और उसे कानून, समाज और अपने ही लोगों के तानों का सामना करना पड़ता है.

दिल टूटने के बावजूद ज़ैनब हार नहीं मानती और अपने हक के लिए लड़ने का फैसला करती है. उसकी जिंदगी में तब मोड़ आता है जब उसकी मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के वकील रमजान कादिर (मिथुन चक्रवर्ती) से होती है, जो उसे इंसाफ की राह दिखाते हैं.

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मिथुन चक्रवर्ती छा गए

एक्टिंग की बात करें तो मायरा सरीन ने अपनी डेब्यू फिल्म में अच्छा काम किया. ज़ैनब के दर्द और मजबूती को उन्होंने ईमानदारी से दिखाया. आफताब शिवदासानी ने नेगेटिव रोल में काफी बेहतरीन परफॉर्मेंस दी और उनका किरदार लोगों को गुस्सा दिलाने में कामयाब रहा.

मिथुन चक्रवर्ती की एंट्री के बाद फिल्म की पकड़ मजबूत हो जाती है. उनका किरदार, डायलॉग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी. जया प्रदा एक एक्टिविस्ट के रूप में और जाकिर हुसैन एक विरोधी वकील के रूप में छोटे लेकिन असरदार रोल में नजर आए.


 

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