अभिनेता आयुष शर्मा आजकल बनारस में अपनी नयी फिल्म के शूटिंग में व्यस्त है, भगवान शिव की नगरी में शूटिंग तो वो कर ही रहे हैं साथ ही जब भी उन्हें मौका मिल रहा है वो अलग मंदिर में जाकर दर्शन भी कर रहे हैं, बनारस में ये शूटिंग का आखिरी शेड्यूल है और इस फिल्म का नाम है काशी जिसमें आयुष के मुताबिक ये अलग तरह का किरदार है जो उन्होंने पहले नहीं किया. इस शूटिंग के शेड्यूल पर इनकी पत्नी और सलमान खान की छोटी बहन अर्पिता खान भी आ चुकी हैं और इस बार आयुष की मां साथ हैं जो उनके साथ जाकर मंदिरों में भगवान से आशीर्वाद ले रहीं. इस मौके पर एनडीटीवी ने आयुष शर्मा से की खास बातचीत जिसमें उन्होंने अपने किरदार और फिल्म के बारे में बताया.
प्रशांत : आयुष, आप काशी (वाराणसी) में हैं. आप मुझे यह बताइए कि वहां आप दर्शनों के लिए गए हैं या फिल्म की शूटिंग के लिए आए हैं? क्योंकि ज्यादातर लोग तो दर्शनों के लिए ही जाते हैं और फिल्म स्टार्स भी अक्सर अपनी फिल्मों के समय वहां जाते हैं.
आयुष शर्मा: सर, हम यहां तीनों चीजों के लिए आए हैं. फिल्म की शूटिंग भी हो रही है, ब्रेक में हम लोग दर्शन भी कर रहे हैं और इस बहाने यहां के लोगों के बीच हमारी फिल्म को लेकर एक अवेयरनेस भी बन रही है. हमारी फिल्म की कहानी काशी पर ही आधारित है. यह काशी और मुंबई के बीच की कहानी है, इसलिए हम इसका एक हिस्सा बनारस में शूट कर रहे हैं. इस समय मेरी फैमिली और मेरी मदर भी मुझे विजिट कर रही हैं, तो हम लोग इस बहाने बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर और कालभैरव मंदिर भी जा रहे हैं. दोनों चीजें साथ में चल रही हैं.
प्रशांत : आप यहां पहली बार आए हैं या पहले भी आ चुके हैं?
आयुष शर्मा: बनारस में यह मेरा तीसरा ट्रिप है. पहले मैं अपनी एक फिल्म के प्रमोशन के लिए आया था, तब मुझे घूमने का मौका नहीं मिला था. पिछले साल इसी फिल्म की थोड़ी शूटिंग के लिए हम आए थे और अब फिल्म को कंप्लीट करने के लिए वापस आए हैं. यह मेरी पसंदीदा जगहों में से एक है. हमें लगा कि हम बनारस को और बेहतर तरीके से फिल्म में दिखा सकते हैं, इसलिए हम यहां वापस आए हैं.
प्रशांत : यदि आप बता सकें, तो इस फिल्म का मुद्दा क्या है? यह किस बारे में है?
आयुष शर्मा: यह बनारसी फ्लेवर में बनी एक बहुत ही दिलचस्प थ्रिलर और डार्क कॉमेडी है. इसके सभी कैरेक्टर्स लोकल हैं. इसमें दिखाया गया है कि कैसे बनारस के पांच अलग-अलग कैरेक्टर्स एक थ्रिलर (मुसीबत) में फंस जाते हैं. ये कैरेक्टर्स तस्करी (smuggling) के काम में जुड़े हैं. इसके बाद कहानी मुंबई जाती है और वहां इसका रेजोल्यूशन होता है.
प्रशांत : आप कितने दिनों से बनारस में हैं और क्या यह आखिरी शेड्यूल है?
आयुष शर्मा: जी, यह हमारा लास्ट शेड्यूल है. पिछले साल हमने लगभग 40-45 दिनों का शेड्यूल शूट किया था और अब इस साल हम फिल्म पूरी कर रहे हैं. पिछली बार हम बनारस में 10 दिनों के लिए थे और इस बार 5 दिनों के शेड्यूल पर आए हैं. बस हमारे आखिरी 5 दिन बचे हैं और फिल्म पूरी हो जाएगी.
प्रशांत: शूटिंग खत्म होने के बाद आप बनारस की कौन सी यादें साथ लेकर जाएंगे, जो आपको बाकी शहरों से अलग लगीं?
आयुष शर्मा: मुझे लगता है कि काशी पूरे हिंदुस्तान में एक बिल्कुल अलग और अनोखा शहर है. यहां के लोग, यहां का कल्चर और सबसे जरूरी यहां के घाट अद्भुत हैं. मुझे फोटोग्राफी का बहुत शौक है, इसलिए मेरे लिए यह एक ऐसा खूबसूरत शहर है जहां आप जिस तरफ भी कैमरा घुमाएं, आपको खूबसूरती ही मिलेगी. यहां का जो स्ट्रॉन्ग हिंदुज्म ईथॉस है, वो एक्सपीरियंस करने को मिलता है. हम मणिकर्णिका घाट भी गए थे. इस बार भी मैं गंगा घाट की बोट राइड और वहां की स्पेशल आरती को देखने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं. जो एक्सपीरियंस बनारस देता है, वो दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकता.
प्रशांत : इस फिल्म के डायरेक्टर और बाकी स्टारकास्ट कौन हैं?
आयुष शर्मा: इस फिल्म के डायरेक्टर किरण कोरुपाटी हैं. फिल्म में मेरे साथ शरद केलकर साहब, तिग्मांशु धुलिया साहब, रघुवीर यादव साहब और एक मराठी एक्टर गौरव मोरे हैं. हम चारों-पांचों के बीच ही यह कहानी घूमती है.
प्रशांत : आपने बताया कि आपकी मदर और वाइफ भी आई हैं. मदर्स का पॉइंट ऑफ व्यू अक्सर पूजा-पाठ को लेकर अलग होता है. उनका एक्सपीरियंस कैसा रहा?
आयुष शर्मा: बिल्कुल, पिछली बार जब मैं आया था तब मेरी वाइफ ने मुझे जॉइन किया था. उस समय मेरी मॉम नहीं आ पाई थीं. इस बार जब उन्हें पता चला कि हम बनारस जा रहे हैं, तो उनकी बहुत इच्छा थी कि वो बनारस देखें. कहते हैं ना कि जब शिव जी का बुलावा आता है, तभी ऐसी प्लानिंग होती है. वो शूटिंग से ज्यादा मंदिरों में इंटरेस्टेड हैं. हम दोनों बैठकर यही प्लान कर रहे थे कि उन्हें कौन-कौन से मंदिर और किस समय जाना चाहिए. उन्होंने सालों से काशी की आरती के बारे में सुना है, विशेषकर 'सुप्रभातम' और नाइट आरती, तो वो गंगा घाट के किनारे बैठकर इसे देखने के लिए बहुत एक्साइटेड हैं. मैं उनसे हंसी-मजाक में कहता भी रहता हूं कि अब आपकी ऐसी उम्र हो गई है कि आपको मोक्ष के शहर बनारस आ जाना चाहिए.
प्रशांत : आप शिव भक्त हैं या हनुमान भक्त?
आयुष शर्मा: जी, मैं शिव भक्त हूं. मेरे लिए शिव जी मेरे बहुत क्लोज हैं.
प्रशांत : बनारस में इस समय बहुत गर्मी है. सुबह से शाम तक शूटिंग करने में कितनी दिक्कत आ रही है और आपका यह किरदार पिछली फिल्मों से कितना अलग है?
आयुष शर्मा: हां, गर्मी तो बहुत है, लेकिन जिस लोकेशन पर हम हैं और जैसा हमारा काम है, उसकी एक्साइटमेंट तापमान के असर को कम कर देती है. जहां तक किरदार की बात है, तो यह मेरी पिछली फिल्मों से काफी अलग है. मैं एक लोकल बनारसी लड़के का रोल प्ले कर रहा हूं, जिसका नाम 'सतरंगी' है. यह काफी इंटरेस्टिंग और रूटेड कैरेक्टर है. कहानी की शुरुआत में वह नास्तिक होता है, जो पूरी जिंदगी बनारस में काटने के बाद भी मन में कोई आस्था नहीं रखता, लेकिन धीरे-धीरे अंत तक वह कैसे आस्तिक बनता है, यही इस किरदार का ग्राफ है. मैंने पहले गुजराती और मराठी कैरेक्टर किए हैं, पहली बार बनारसी किरदार कर रहा हूं. इसमें मेरा थोड़ा कॉमिक अंदाज भी है.
प्रशांत : आपने बनारस की भाषा का कोई दिलचस्प शब्द या फ्रेज सीखा?
आयुष शर्मा: मेरे लिए तो सबसे इंपॉर्टेंट फ्रेज है "महादेव भैया!" यहां जब भी किसी से मुलाकात होती है, तो लोग सबसे पहले यही बोलते हैं. हमने इसे अपने सेट का तकियाकलाम बना लिया है. जब भी कोई मिलता है, हम कहते हैं- महादेव भैया!
प्रशांत : इस फिल्म की शूटिंग क्या मुंबई में भी होनी है या यहीं खत्म हो जाएगी? और यह फिल्म कब तक रिलीज होगी?
आयुष शर्मा: हमारी फिल्म की शुरुआत बनारस से हुई थी और इसका अंत भी हम बनारस में ही कर रहे हैं. हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल सितंबर या अक्टूबर के महीने में हम इस फिल्म को सिनेमाघरों में ला सकेंगे.
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