अल्लू अर्जुन के बर्थडे पर उनकी अपकमिंग फिल्म राका का ऐलान किया गया है, जिसे एटली ने डायरेक्ट किया. जबकि दीपिका पादुकोण नजर आने वाली हैं. लेकिन फिल्म का राका और फर्स्ट लुक देख फैंस के बीच फिल्म का एक्साइटमेंट फैंस के बीच बढ़ा हुआ दिख रहा है. हालांकि पुराने हिंदी सिनेमा का जादू ही कुछ ऐसा था कि वहां विलेन भी हीरो से कम नहीं होते थे. ऐसा ही 1960 में रिलीज हुई ‘जिस देश में गंगा बहती है' में एक ऐसा डाकू दिखा, जिसने अपनी एंट्री से ही माहौल बदल दिया. ये डाकू ना सिर्फ खतरनाक था बल्कि बेहद चालाक भी था, जो हर चाल बहुत सोच-समझकर चलता था. उसकी आंखों में डर नहीं बल्कि हुकूमत करने का जुनून नजर आता था. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसका असली रंग और गहरा होता जाता है और दर्शक उसके हर कदम पर नजर टिकाए रहते हैं. इस दमदार और खौफनाक राका के रोल में नजर आए थे प्राण.
कहानी में राका की पकड़
राका फिल्म का सबसे तगड़ा और असरदार किरदार है. वो हर मौके पर अपने फायदे को सबसे ऊपर रखता है और लोगों को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश करता है. राजू जैसे सीधे इंसान को भी वो अपने जाल में फंसाना चाहता है. कभी डर दिखाकर तो कभी दबाव बनाकर, वो अपनी बात मनवाता है. यही वजह है कि उसका किरदार हर सीन में भारी पड़ता है.
सच्ची घटनाओं से जुड़ी थी फिल्म
इस फिल्म की कहानी सिर्फ कल्पना नहीं थी, बल्कि उस दौर की सच्ची घटनाओं से प्रेरित थी. उस समय देश में डाकुओं को सुधारने और उन्हें समाज में वापस लाने की कोशिशें चल रही थीं. फिल्म में भी यही दिखाया गया है कि कैसे आखिर में डाकू आत्मसमर्पण करते हैं. यही बात इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाती है और एक खास संदेश देती है.
बजट, कमाई और फिल्म का रिकॉर्ड
अगर फिल्म के बिजनेस की बात करें तो ‘जिस देश में गंगा बहती है' का बजट करीब 1 करोड़ रुपये था. वहीं इसने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 5 से 6 करोड़ रुपये की कमाई की. उस समय ये बहुत बड़ी सफलता मानी जाती थी. यही वजह है कि ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई और लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रही. राका का खौफ और फिल्म की कहानी, दोनों आज भी याद किए जाते हैं.
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