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55 साल पहले की वो फिल्म, 189 दिन तक थिएटर्स में काटा बवाल, हीरो से ज्यादा पसंद की गई विलेन की एंट्री, IMDb रेटिंग आज भी 7.1

70 का दशक हिंदी सिनेमा के लिए तेजी से बदलते दौर का समय था. इसी बीच एक ऐसी फिल्म आई, जिसने गांव, डकैत, एक्शन और सस्पेंस को मिलाकर ऐसा माहौल बनाया कि सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी.

55 साल पहले की वो फिल्म, 189 दिन तक थिएटर्स में काटा बवाल, हीरो से ज्यादा पसंद की गई विलेन की एंट्री, IMDb रेटिंग आज भी 7.1
55 साल पहले की यह फिल्म रही थी सुपरहिट

70 का दशक हिंदी सिनेमा के लिए तेजी से बदलते दौर का समय था. उस वक्त रोमांटिक फिल्मों का दबदबा जरूर था, लेकिन दर्शक बड़े पर्दे पर कुछ नया और ज्यादा रोमांचक देखना चाहते थे. इसी बीच एक ऐसी फिल्म आई, जिसने गांव, डकैत, एक्शन और सस्पेंस को मिलाकर ऐसा माहौल बनाया कि सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी. यह फिल्म थी ‘मेरा गांव मेरा देश'. धर्मेंद्र, आशा पारेख और विनोद खन्ना स्टारर इस फिल्म को आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार एक्शन-ड्रामा फिल्मों में गिना जाता है.

फिल्म को रिलीज हुए 55 साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन इसके डायलॉग, गाने और खासकर डकैत वाले किरदार की चर्चा आज भी पुराने सिनेमा प्रेमियों के बीच होती है. उस दौर में फिल्म करीब 189 दिनों तक थिएटरों में चली थी, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी.

विनोद खन्ना का खलनायक अवतार बना फिल्म की जान

फिल्म में धर्मेंद्र जहां हीरो ‘अजीत' के किरदार में नजर आए थे, वहीं विनोद खन्ना ने ‘जब्बार सिंह' नाम के खतरनाक डकैत का रोल निभाया था. उस दौर में यह किरदार इतना चर्चित हुआ कि कई लोग इसे हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार विलेन रोल्स में गिनने लगे. कहा जाता है कि विनोद खन्ना की स्क्रीन प्रेजेंस और डकैत वाले अंदाज ने फिल्म में अलग ही रोमांच पैदा कर दिया था. यही वजह थी कि फिल्म का खलनायक भी दर्शकों के बीच उतना ही लोकप्रिय हो गया, जितना उसका हीरो.

गांव, डकैत और एक्शन का अलग ही माहौल

फिल्म की कहानी एक ऐसे गांव के इर्द-गिर्द घूमती है, जो डकैतों के आतंक से परेशान रहता है. इसके बाद धर्मेंद्र का किरदार गांव वालों की मदद के लिए सामने आता है और यहीं से कहानी में एक्शन और ड्रामा का असली खेल शुरू होता है. उस दौर में बड़े-बड़े VFX या हाई-टेक एक्शन सेटअप नहीं होते थे. इसके बावजूद फिल्म के डकैत सीक्वेंस, गांव का माहौल और एक्शन दर्शकों को सीट से बांधे रखने में कामयाब रहे.

धर्मेंद्र की एक्शन इमेज को मिला बड़ा फायदा

आज धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े एक्शन स्टार्स में गिना जाता है. शोले जैसे फिल्म आने से भी काफी पहले ‘मेरा गांव मेरा देश' जैसी फिल्मों ने उनकी एक्शन हीरो वाली इमेज को और मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई थी. इस फिल्म के गाने भी उस दौर में काफी लोकप्रिय हुए थे. “मार दिया जाए कि छोड़ दिया जाए” और “कुछ कहता है ये सावन” जैसे गीत आज भी पुराने फिल्मी संगीत पसंद करने वालों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बने रहते हैं.

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आज के दौर में जहां करोड़ों रुपये खर्च करके बड़े-बड़े एक्शन शोज और फिल्में बनाई जाती हैं, वहीं ‘मेरा गांव मेरा देश' आज भी अपनी कहानी, किरदारों और देसी एक्शन अंदाज की वजह से याद की जाती है.

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