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43 साल पुराना वो दर्द भरा गीत, जिसकी सिंगर को नहीं आता था पढ़ना-लिखना, राजस्थान की बंजारन बन गई पाकिस्तान की सुर कोकिला

43 साल पहले रिलीज हुआ एक दर्द भरा फिल्मी गीत आज भी अधूरी मोहब्बत और बिछड़ने के दर्द की सबसे मजबूत आवाज माना जाता है. दिलचस्प बात ये है कि इसकी नींव एक पार्टी में पड़ी थी.

43 साल पुराना वो दर्द भरा गीत, जिसकी सिंगर को नहीं आता था पढ़ना-लिखना, राजस्थान की बंजारन बन गई पाकिस्तान की सुर कोकिला
'लंबी जुदाई' गाने का आज तक नहीं है कोई तोड़
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने हैं जो समय बीतने के बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा रहते हैं. खासकर दर्द भरे गीतों की बात करें तो कुछ गाने ऐसे हैं जिन्हें सुनते ही अधूरी मोहब्बत, बिछड़ने का दर्द और पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. 1983 में रिलीज हुई फिल्म हीरो का ऐसा ही एक गाना है जो चार दशक से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी दर्द भरे नगमों की लिस्ट में सबसे ऊपर गिना जाता है. दिलचस्प बात ये है कि इस सदाबहार गाने के पीछे कई ऐसे किस्से छिपे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

पार्टी में सुनी आवाज, दे दिया फिल्म का ऑफर

 ये गाना है 'लंबी जुदाई' जिसे अपनी रूहानी आवाज देने वाली मशहूर लोक गायिका रेशमा थीं. कहा जाता है कि सुभाष घई ने पहली बार रेशमा की आवाज राज कपूर की एक पार्टी में सुनी थी. उनकी गायकी और आवाज का दर्द सुनकर वो इतने इंप्रेस हुए कि उसी समय अपनी आने वाली फिल्म हीरो के लिए उन्हें गाना गाने का ऑफर दे दिया. हालांकि शुरुआत में रेशमा इसके लिए तैयार नहीं थीं. तब रेशमा दरगाहों और लोक संगीत की महफिलों में गाने गाया करती थीं. उन्हें बंद स्टूडियो में रिकॉर्डिंग करने का कॉन्सेप्ट समझ नहीं आया. बाद में सुभाष घई ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी नैचुरल गायकी को किसी तरह बदला नहीं जाएगा. इसके बाद रेशमा ने ये गीत रिकॉर्ड किया और वो इतिहास बन गया.

मिली नई पहचान

फिल्म हीरो में जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्री मुख्य भूमिकाओं में थे. लेकिन फिल्म की पॉपुलेरिटी में 'लंबी जुदाई' का भी बड़ा योगदान माना जाता है. इस गीत का म्यूजिक मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था. जबकि इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे. इस गाने से रेशमा को रेगिस्तान की कोकिला की पहचान भी मिली. उनका जन्म राजस्थान के बीकानेर में एक बंजारा परिवार में हुआ था. उनकी आवाज में लोक संगीत की मिठास और दर्द का ऐसा संगम था जो सीधे दिल को छू जाता था. इस गीत की पॉपुलेरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाद में इसे 1997 की फिल्म जुदाई में नए अंदाज में फिर से पेश किया गया जिस को अलका याज्ञनिक ने अपनी आवाज दी थी. लेकिन आज भी जब 'लंबी जुदाई' बजता है तो रेशमा की आवाज ही लोगों के दिलों में सबसे गहरा असर छोड़ती है.

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