एयर इंडिया के 171 प्लेन हादसे को कोई नहीं भूल पाया है, जो 1 साल पहले 12 जून को हुआ था. प्लेन में 242 लोग सवार थे, जिसमें 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर्स थे. वहीं 241 लोगों की इस मादसे में मौत हो गई थी. जबकि 1 यात्री बच पाया था. लेकिन यह आंकड़ा सिर्फ इतना ही नहीं था. जबकि विमान जहां गिरा वह मेडिकल कॉलेज का छात्रावास था, जिसके चलते 19 लोगों की मौत हो गई. लेकिन इसमें एक फिल्ममेकर भी था, जिसकी मौत हुई. उसकी स्कूटी से हो पाई. इसका दर्द मृत फिल्ममेकर महेश जीरावाला के भाई कार्तिक ने बयां किया.
34 वर्षीय फिल्ममेकर की हुई थी दर्दनाक मौत
NDTV को मिली जानकारी के अनुसार, 19 निर्दोष लोगों की इस विमान हादसे में जान गई. इसमें अहमदाबाद के 34 वर्षीय लोकल फिल्ममेकर भी थे, जो फ्लाइट में नहीं थे. बल्कि सिर्फ हेस्टल के करीब से गुजर रहे थे. जब प्लेन हादसा हुआ. वह अपनी स्कूटी से फिल्म से जुड़े काम के लिए जा रहे थे. तभी प्लेन क्रैश हुआ और वहीं जाकर गिरा जहां से वह गुजर रहे थे. इसके कारण उनका निधन हो गया. जबकि उनका परिवार कभी सोच भी नहीं सकता था कि इस प्लेन क्रैश में उनके बच्चे की भी जान गई. वहीं जब फोन नहीं मिल पाया तो उनके भाई कार्तिक ने लापता होने की शिकायत लोकल पुलिस स्टेशन में दर्ज की. वहीं पुलिस ने उन्हें बताया कि महेश का आखिरी बार एक्टिव मोबाइल टॉवर प्लेन क्रैश की लोकेशन के पास था.
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एक्टिवा से महेश की मौत का चला पता

महेश की मौत से अनजान परिवार ने सीसीटीवी के जरिए बेटे की तलाश जारी रखी. अहमदाद पुलिस ने इस मामले की जांच जारी रखी और देखा कि वह एक रास्ते पर जा रहा था. लेकिन बीच में गायब हो गया. वहीं 8 दिन बाद अस्पताल से एक फोन आया और बताया कि एक डीएनए सैंपल जलते हुए मलबे से मिले जले हुए अवशेषों से मैच हुआ, जो कि एक्टिवा स्कूटी से बरामद की गई थी. 34 वर्षीय महेश आखिरी पीड़ित थे, जिनकी पहचान हुई. वहीं आज हादसे के एक साल बाद भी उनकी मां और परिवार बेटे की मौत को कुबूल नहीं कर पाया है. एनडीटीवी से बात करते हुए महेश के भाई ने बताया कि उनका भाई सिर्फ फिल्ममेकर नहीं बल्कि एक सोशल वर्कर भी था, जो लोगों की मदद करता था.
महेश के भाई कार्तिक ने कहा- हम हैरान रह गए और टूट गए
कार्तिक ने कहा, हमने लोकल पुलिस स्टेशन में कम्पलेन की थी. हम सोच भी नहीं सकते थे कि हमारा भाई प्लेन क्रैश में इस दुनिया को अलविदा कहेगा. हम टूट गए थे जब उसकी आखिरी लोकेशन क्रैश साइट के पास मिली. हमने सोचा भी नहीं था कि वो उस जगह पर हो सकता है. लेकिन हमें उम्मीद थी. 8 दिन बाद जब हमसे कहा गया कि डीएनए मैच हो गया है तो हम हैरान रह गए और टूट गए. हमने भाई की एक्टिवा का नंबर और चेसिस नंबर मैच होते हुए देखा. सब खत्म हो गया. उनकी एक्टिवा देख कर हमारा बचा कुचा हौसला भी टूट गया. वह बहद अच्छे सोशल वर्कर भी थे. हमने जरुरतमंद लोगों के लिए कई कैंप भी आयोजित किए थे.
पिता ने कहा- आज मेरे पास मुआवजे के पैसों में से कुछ नहीं बचा
महेश 34 साल के फिल्म मेकर थे, जिनकी पत्नी हेतल से शादी के 3 महीने बाद क्रैश में निधन हो गया. उनके पिता 61 वर्षीय गिरधरभाई जीरावाला डायमंड पॉलिश करने का काम करते थे. उन्होंने बेटे से निधन के दो हफ्ते बात का जिक्र किया. जब उन्हें हार्ट अटैक आया था और पिता की बिगड़ती तबीयत को देखकर उन्हें रिटायर होकर घर में आराम करने के लिए महेश ने कहा था. महेश ने कहा, पापा आप आराम करो. दीवाली से पहले मैं हमारा सारा कर्ज चुका दूंगा. और इस किराए के मकास ने मुक्ति दिला कर हमारा घर खरीदूंगा. आगे गिरधरभाई ने इमोशनल होते हुए कहा, आज मेरे पास मुआवजे के पैसों में से कुछ नहीं बचा है. लेकिन खुश हूं कि मेरा बेटा मर कर भी परिवार को सम्मान से जीने का सहारा दे गया. बिगड़ी सेहत के कारण गिरधर भाई अब काम नहीं करते. जबकि 20000 रुपए की कमाई से कार्तिक अपने परिवार का खर्च उठाता है.
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