चारों ओर पानी और हरी घास, फिर भी क्यों मर रही हजारों गायें!

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में चारों ओर पानी और घास होने के बावजूद हजारों मवेशी भूख-प्यास से मर रहे हैं. बाढ़ के बाद की यह रहस्यमयी त्रासदी चिंता बढ़ा रही है.

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हैरान कर देने वाला मंजर

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में एक ऐसी भयावह और हैरान कर देने वाली त्रासदी सामने आई है, जिसने न सिर्फ किसानों बल्कि पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है. चारों तरफ ताजा पानी, हरी-भरी घास और खुला आसमान होने के बावजूद हजारों गायें भूख और प्यास से दम तोड़ रही हैं.

कहां और कैसे हो रही है यह त्रासदी?

यह दर्दनाक स्थिति उत्तर-पश्चिम क्वींसलैंड के आउटबैक इलाके में देखने को मिल रही है. लगातार बारिश के कारण विशाल मैदानी इलाके डूब चुके हैं और जगह-जगह छोटे-छोटे टापू जैसे हिस्से बन गए हैं. इन्हीं टापुओं पर फंसे हुए हजारों मवेशी चारों ओर से ताजे बारिश के पानी से घिरे हुए हैं, लेकिन वे पानी में उतरने से डर रहे हैं. उनके सामने घास उग रही है, लेकिन बीच में पानी होने के कारण वे वहां तक जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे.

यह बिल्कुल बेतुका लगता है...

द गार्जियन के मुताबिक,  स्थानीय पशुपालक एंगस प्रॉपस्टिंग का कहना है, यह सुनने में बिल्कुल बेतुका लगता है, लेकिन सच यही है कि गायें पानी से घिरी होने के बावजूद प्यास से मर रही हैं. उनका कहना है कि मवेशी इतने डर और सदमे में हैं कि वे अपने छोटे से टापू को छोड़ने को तैयार नहीं हैं. वे कहते हैं, वे भूखे मरना पसंद कर रहे हैं, लेकिन पानी में कदम रखने को तैयार नहीं. 

डर, सदमा और मानसिक टूटन

किसानों के मुताबिक, यह सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक संकट भी है. मवेशी कई दिनों से पानी और कीचड़ में खड़े हैं. उनका शरीर कमजोर हो चुका है और मानसिक रूप से वे पूरी तरह टूट चुके हैं. एक अन्य पशुपालक गाइ कीट्स कहते हैं, हम रोज़ बछड़ों को मरते देख रहे हैं. यह सब बहुत थका देने वाला और अंदर से तोड़ देने वाला है.

2019 की डरावनी यादें फिर ताज़ा

यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो. साल 2019 में भी क्वींसलैंड में भयानक बाढ़ आई थी, जिसमें करीब 5 लाख मवेशी और भेड़ें डूबने, ठंड और भूख से मर गई थीं. स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस बार नुकसान उससे कम हो सकता है, लेकिन अनुमान है कि अब तक 1 लाख तक मवेशी मर चुके हैं.

खतरा अभी टला नहीं

हालात और बिगड़ सकते हैं. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कोरल सागर में एक ट्रॉपिकल सिस्टम बन रहा है, जो साइक्लोन का रूप ले सकता है. अगर दोबारा भारी बारिश हुई, तो पहले से भीगे इलाकों में हालात और भयावह हो सकते हैं. यह त्रासदी सिर्फ जानवरों तक सीमित नहीं है. किसान और पशुपालक मानसिक रूप से गहरे तनाव और सदमे में हैं. स्थानीय मेयर जॉन व्हार्टन कहते हैं, जब आप कीचड़ से निकलती लाशें देखते हैं, तो इंसान अंदर से सुन्न हो जाता है.

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