सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला पुलिस अधिकारी उन लड़कियों और महिलाओं को सख़्त नसीहत देती नजर आ रही हैं, जो शादी के बाद ससुराल में छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा, कलेश और मुकदमेबाज़ी का रास्ता अपनाती हैं. यह वीडियो खासतौर पर झूठे घरेलू मामलों और 498ए जैसे कानूनों के दुरुपयोग को लेकर चर्चा में है.
शादी के बाद कौन से सींग निकल आते हैं?
वीडियो में महिला पुलिस अधिकारी कहती हैं कि उनकी बात कई लोगों को बुरी लग सकती है, लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. वह सवाल करती हैं कि जब लड़कियां अपने मायके में रहती हैं, तो सीमित सुविधाओं में भी समायोजन कर लेती हैं. मायके में जो खाने को मिलता है, वही खाती हैं और माता-पिता की स्थिति के अनुसार जीवन जीती हैं. लेकिन शादी के बाद जैसे ही ससुराल जाती हैं, उन्हें अचानक ब्रांडेड कपड़े, महंगे जूते, एसी और हर तरह की सुविधाएं चाहिए होती हैं. अफसर का सवाल है कि क्या ससुराल घर बसाने के लिए जाते हैं या उसे उजाड़ने के लिए?
अपने परिवार का उदाहरण देकर समझाया
महिला पुलिस अधिकारी अपने घर का उदाहरण देती हैं. वह कहती हैं कि जब उनकी मां की शादी हुई थी, तब उनके पिता के पास नौकरी तक नहीं थी, लेकिन फिर भी दोनों ने मिलकर संघर्ष किया, बच्चों को पाला, पढ़ाया और एक मजबूत परिवार खड़ा किया. उनका कहना है कि अगर हर महिला केवल सुविधाओं की मांग करेगी और संघर्ष से भागेगी, तो कोई भी रिश्ता टिक नहीं पाएगा.
देखें Video:
498ए और मुकदमेबाज़ी पर सीधी बात
वीडियो में अधिकारी यह भी कहती हैं कि अगर सास-ससुर दो-चार बातें कह दें, तो तुरंत 498ए लेकर खड़े हो जाना किसी समस्या का समाधान नहीं है. हर चीज का हल न तो मुकदमा है और न ही हर बात पर कलेश. वह बताती हैं कि पुलिस विभाग में रहते हुए वह रोज़ टूटते परिवार और बर्बाद होते रिश्ते देखती हैं. कुछ गलत मामलों की वजह से अब अच्छी और सच्ची लड़कियों की भी बात नहीं सुनी जाती.
ससुराल में पूरी ज़िंदगी बितानी है...
महिला अफसर का कहना है कि मायके में इंसान 20-25 साल रहता है, लेकिन ससुराल में पूरी ज़िंदगी बितानी होती है. इसलिए ससुराल वालों को भी उतने ही खुले दिल से अपनाना चाहिए, जितना अपने माता-पिता को अपनाया जाता है. अगर सास-ससुर को माता-पिता की तरह समझा जाए, तो परिवार बेहतर तरीके से चल सकता है.
जमकर मिल रहा समर्थन
इस वीडियो को एक्स पर @DeepikaBhardwaj नाम की यूजर ने शेयर किया है. उन्होंने कैप्शन में लिखा, इस महिला पुलिस अधिकारी को सच बोलने के लिए पदक मिलना चाहिए. उनका कहना है कि किसी भी महिला थाने में जाकर देखा जा सकता है कि सच्चे और झूठे मामलों में कितना अंतर होता है. वीडियो को अब तक 28 हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है और एक हजार से अधिक लोग इसे पसंद कर चुके हैं. सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बहस भी छिड़ गई है.
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