करोड़पति बिजनेसमैन क्यों बन गया रैपिडो ड्राइवर? ये कहानी झकझोर देगी

Rapido ड्राइवर की वायरल कहानी ने सोशल मीडिया को झकझोर दिया. कभी 14 करोड़ का बिज़नेस, आज मजबूरी में बाइक चला रहा शख्स, COVID के बाद की सच्चाई बयां करता है.

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कभी करोड़ों का बिज़नेस, आज Rapido ड्राइवर!

सोशल मीडिया पर एक Rapido बाइक ड्राइवर की कहानी तेज़ी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ज़िंदगी कब, कैसे और किस मोड़ पर पलट जाए, किसी को नहीं पता. एक आम सी बाइक राइड के दौरान सामने आई यह कहानी आज लाखों लोगों को भावुक कर रही है.

एक सामान्य राइड, जो बन गई ज़िंदगी की कहानी

एक्स यूज़र चिराग ने अपने पोस्ट में बताया कि उन्होंने Rapido से एक सामान्य बाइक राइड ली थी. शुरुआत में बातचीत बिल्कुल आम थी, घर कहां है, कौन से कॉलेज में पढ़ते हो, वैसी ही बातें जो अक्सर छोटी राइड्स में हो जाती हैं. लेकिन कुछ ही मिनटों में बातचीत ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने चिराग को भीतर तक झकझोर दिया.

पढ़ाई, फौज और आरामदायक ज़िंदगी

रैपिडो ड्राइवर ने बताया कि उसने अमिटी से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी. उसके पिता आर्मी में थे और परिवार का अपना सफल बिज़नेस था. उस दौर को याद करते हुए उसने कहा कि ज़िंदगी तब आसान और खुशहाल थी. परिवार आर्थिक रूप से मजबूत था और भविष्य को लेकर कोई चिंता नहीं थी. 

जब COVID ने सब कुछ तबाह कर दिया

फिर आया कोरोना काल. ड्राइवर ने बताया कि महामारी ने उनके परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी. बिज़नेस ठप हो गया और देखते ही देखते 13 से 14 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया. जो कुछ सालों में बनाया था, वह सब कुछ खत्म हो गया. उम्मीद के आखिरी सहारे के तौर पर ड्राइवर ने एक दोस्त के साथ स्टार्टअप शुरू किया, लेकिन वह भी नहीं चल पाया. इसमें उसे करीब 4 लाख रुपये का और नुकसान उठाना पड़ा. उसके बाद हालात ऐसे हो गए कि जेब में कुछ भी नहीं बचा.

‘मेरे पास बस ये बाइक थी'

ड्राइवर ने बताया कि उस वक्त उसके पास सिर्फ उसकी बाइक बची थी. उसी बाइक से उसने Rapido चलाना शुरू किया. सबसे भावुक पल तब आया, जब उसने कहा- मैं थक चुका हूं, लेकिन टूटा नहीं हूं. मैं भगवान पर भरोसा करता हूं. एक आखिरी कोशिश करूंगा. हार मानने से पहले एक मौका और दूंगा. यह कहते-कहते वह बाइक चलाते हुए रो पड़ा.

पैसेंजर भी हो गया खामोश

चिराग ने लिखा कि उस पल वह कुछ बोल ही नहीं पाए. पूरी राइड के दौरान वे खामोश बैठे रहे. उन्होंने लिखा- उस दिन मुझे एहसास हुआ कि ज़िंदगी वाकई कई बार बेहद नाइंसाफ होती है. इस पोस्ट के वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में बहस छिड़ गई. कई यूज़र्स ने लिखा कि COVID ने न जाने कितने परिवारों को आर्थिक रूप से तबाह कर दिया. कुछ लोगों ने इसे उन संघर्षों की कहानी बताया, जो बाहर से कभी दिखाई नहीं देते.

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अदृश्य संघर्ष और टूटती पहचान

यह कहानी सिर्फ एक Rapido ड्राइवर की नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की है जिनकी पहचान, हैसियत और भविष्य एक झटके में छिन गया. यह याद दिलाती है कि हर चेहरे के पीछे एक कहानी होती है,कुछ सुनाई देती हैं, कुछ बाइक की सवारी के साथ खामोशी में छूट जाती हैं.

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