- ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को चार महीने बाद 9 जुलाई को उनके जन्मस्थान मशहद में दफनाया जाएगा
- खामेनेई के जनाजे का पांच दिन तक व्यापक कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा
- उनके शव को तेहरान में दो दिन रखा जाएगा फिर इराक के नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मौत के 4 महीने बाद दफनाया जाएगा. 9 जुलाई को ईरान के मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा. यह वही शहर है, जहां खामेनेई का जन्म हुआ था. इससे पहले 6 दिन तक कार्यक्रम होंगे, जिसमें लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है.
अली खामेनेई का शव तेहरान के मोसल्ला प्रेयर कॉम्प्लेक्स में रखा जाएगा. फिर उनके शव को इराक के नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा. आखिर में ईरान के कोम में वापस लाया जाएगा और फिर 9 जुलाई को उन्हें दफना दिया जाएगा.
ईरान में अली खामेनेई के जनाजे का कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू हो रहा है. ये 9 जुलाई तक चलेगा. अली खामेनेई को आखिरी विदाई देने के लिए लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है और इसके लिए ईरान से लेकर इराक तक भारी व्यवस्था की गई है.
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इस हमले में उनकी बेटी, दामाद और पोती की भी मौत हो गई थी. कई सीनियर अधिकारी भी मारे गए थे.
क्या है पूरा कार्यक्रम?
खामेनेई के जनाजे का कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा.
- 4 और 5 जुलाई: तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला कॉम्प्लेक्स में विदाई समारोह शुरू होगा. यह दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद में से एक है. खामेनेई का शव दो दिन तक यहां रखा जाएगा, ताकि आखिरी जुलूस से पहले लोग उन्हें अपनी आखिरी श्रद्धांजलि दे सकें.
- 6 और 7 जुलाई: राजधानी तेहरान में उनके जनाजे का मुख्य जुलूस निकाला जाएगा. अगले दिन 7 जुलाई को कोम में दूसरा जुलूस निकाला जाएगा. 7 जुलाई की शाम खामेनेई का शव इराक के नजफ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचेगा.
- 8 जुलाई: नजफ में सुबह 6 बजे इमाम अली की दरगाह के पास से जुलूस निकाला जाएगा, जो कूफा से थवरात अल-इशरीन स्क्वायर की ओर बढ़ेगा. उसी दिन कर्बला में दूसरा जुलूस निकलेगा. यह जुलूस शाम को बैन अल-हरमैन के पास खत्म होगा.
- 9 जुलाई: आखिरी जुलूस निकाला जाएगा, जिसके बाद खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों को मशहद में इमाम रजा की दरगाह में दफनाया जाएगा. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने अपनी वसीयत में इमाम रजा की दरगाह में दफनाने की इच्छा जताई थी.
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तारीखों के पीछे है खास मैसेज?
मौत के 4 महीने बाद खामेनेई को 9 जुलाई को दफनाया जाएगा. ईरान ने शुरुआत में 4 मार्च को उन्हें दफनाने की बात कही थी. लेकिन जंग भड़कने के कारण इसे टाल दिया गया.
उनके जनाजे का कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू हो रहा है. CNN ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि उनके जनाजे के समारोह के लिए जो तारीखें चुनी गई हैं, वह एक तरह से अमेरिका को संदेश है. 4 जुलाई को ही अमेरिका का 250वां स्वतंत्रता दिवस है और इसी दिन खामेनेई के शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा.
इतना ही नहीं, खामेनेई का ईरान और इराक में लाखों लोगों की मौजदूगी में जुलूस निकाला जाएगा. जिस दिन अमेरिका अपनी आजादी का दिन मना रहा होगा, उसी दिन तेहरान में खामेनेई का जुलूस निकलेगा.
खामेनेई का जुलूस ऐसे समय निकाला जा रहा है, जब मुहर्रम का महीना है. शिया इस्लाम में मुहर्रम को मातम, धोखा और शहादत का महीना माना जाता है. खामेनेई को भी शहीद दिखाने की कोशिश की जा रही है. 7वीं सदी में इमाम हुसैन की शहादत हुई थी और खामेनेई का वंश भी इनसे जुड़ा है.
CNN का कहना है कि 28 फरवरी को युद्ध के पहले ही दिन खामेनेई मारे गए थे, फिर भी उनके जनाजे को ईरान के तीन शहरों और इराक के दो पाक शहरों पर एक विजय जुलूस की तरह आयोजित किया जा रहा है. इसका मकसद लोगों को यह दिखाना है कि खामेनेई मौत के बाद भी हारे नहीं हैं. जबकि, खामेनेई एक ऐसे नेता रहे जिन्हें सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से कुचल दिया.
सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के सीनियर नॉन-रेसिडेंट फेलो सीना तूसी ने CNN से कहा, 'हत्या ने खामेनेई को मौत के बाद प्रतीकात्मक रूप से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बना दिया है. अब खामेनेई को शहादत पाने वाले शिया संतों की तरह ही एक शहीद हस्ती के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिनकी सोच को उनकी मौत के तरीके ने सही साबित कर दिया.'
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पूरी दुनिया को संदेश
खामेनेई के जनाजे के जरिए ईरान पूरी दुनिया को संदेश देने की कोशिश कर रहा है. 6 जुलाई को तेहरान के पूर्वी हिस्से से पश्चिमी छोर तक उनका जुलूस निकाला जाएगा. इसके बाद शव को कोम औ फिर इराक के नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा. आखिर में उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा.
उनके शव को इराक ले जाने के पीछे एक संदेश छिपा है और इसके जरिए खामेनेई को एक ऐसे नेता के तौर पर दिखाना है जो सीमाओं से परे एक क्रांतिकारी ताकत हैं. इसके जरिए ईरान क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है.
तूसी ने CNN से कहा कि खामेनेई को मानने वाले इराक, पाकिस्तान, बहरीन समेत कई मुल्कों में थे, इसलिए नजफ और कर्बला में होने वाला जुलूस काफी अहम है. इन जुलूसों के जरिए ये दिखाने की कोशिश है कि यह सिर्फ ईरान का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय महत्व का पल है.
ईरानी के गृह मंत्री ने भी हाल में कहा था कि ईरान का मकसद इतिहास में सबसे बड़ा 'विदाई समारोह' आयोजित करना है. IRGS के कमांडर अली अकबर पोरजामशिदियन ने कहा कि इसके जरिए पूरी दुनिया को ताकत दिखाने की कोशिश की जाएगी.
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