स्पेन के शहर में 40 दिनों तक काली बिल्ली गोद लेने पर बैन, आखिर 'काला जादू' से कैसे जुड़ा कनेक्शन

स्पेन के इस शहर के पशु कल्याण समूहों ने चेतावनी दी है कि हैलोवीन से जुड़े अनुष्ठानों के दौरान काली बिल्लियों को चोट पहुंचाई जा सकती है, उन्हें मार दिया जा सकता है या प्रॉप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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  • स्पेन के एक शहर में काली बिल्लियों को हैलोवीन के दौरान अनुष्ठानों से बचाने के लिए गोद लेने पर अस्थायी बैन
  • 1 अक्टूबर से 10 नवंबर तक काली बिल्लियों के गोद लेने के अनुरोध को अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया है
  • यह कदम काली बिल्लियों को हैलोवीन के दौरान होने वाले संभावित नुकसान और गलत उपयोग से बचाने के लिए उठाया गया है
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भारत सहित दुनियाभर के कई देशों में काली बिल्ली को अपशकुन का संकेत माना जाता है. इन्हें बुरी किस्मत लाने या जादू-टोने से जोड़ा जाता है. अब इन काली बिल्लियों को स्पेन के एक शहर में मुक्ति मिल गई है. इस शहर में कई लोग हैलोवीन त्योहार के आसपास काला जादू से जुड़े "अनुष्ठानों" के लिए काली बिल्ली का उपयोग करते हैं. अब इन काली बिल्लियों को ऐसे अनुष्ठानों से बचाने के लिए उन्हें गोद लेने पर अस्थायी रूप से बैन लगा दिया गया है.

एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार बार्सिलोना के उत्तर में एक शहर है टेरासा. यहां की पशु कल्याण सेवा ने 6 अक्टूबर को घोषणा की कि "संभावित जोखिम, अंधविश्वासों, अनुष्ठानों या गैर-जिम्मेदाराना उपयोगों" को रोकने के लिए बिल्लियों को किसी भी तरह से गोद लेने या उनके पालन-पोषण करने के अनुरोध को 1 अक्टूबर से 10 नवंबर तक अस्वीकार कर दिया जाएगा.

इस शहर के अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला हैलोवीन से जुड़ा हुआ है. स्थानीय न्यूज पेपर डायरी डी टेरसा की रिपोर्ट के अनुसार पशु कल्याण काउंसलर नोएल ड्यूक ने पिछले सप्ताह कहा था कि हैलोवीन के आसपास "अनुष्ठान के लिए" या "सजावट के रूप में" काली बिल्लियों को गोद लेने के अनुरोध बढ़ जाते हैं क्योंकि 'यह कूल लगता है'.

यहां के पशु कल्याण समूहों ने चेतावनी दी है कि हैलोवीन से जुड़े अनुष्ठानों के दौरान काली बिल्लियों को चोट पहुंचाई जा सकती है, उन्हें मार दिया जा सकता है या प्रॉप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

काम की बात: हैलोवीन 31 अक्टूबर को मनाया जाने वाला एक त्योहार है, जिसमें लोग डरावने या क्रिएटिव ड्रेस पहनते हैं, उसका गेटअप लेटे हैं. इस दिन बच्चे "ट्रीक-या-ट्रीट" (घर-घर जाकर टॉफी या चॉकलेट मांगना) करते हैं और डरावनी सजावट करते हैं. इस त्योहार की जड़ें प्राचीन सेल्टिक त्योहार 'सामहैन' में हैं, जो ठंड में आत्माओं के आने की मान्यता से जुड़ा था. यह ईसाई छुट्टी "ऑल सेंट्स डे" (1 नवंबर) से पहले की रात होती है. 

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