- वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने PM मोदी से ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की
- बैठक में खनिज, फार्मा, कृषि और ऑटोमोबाइल समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर भी बात हुई
- डेल्सी रोड्रिगेज 5 दिन के भारत दौरे पर हैं, उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय तक स्थिर संबंध बनाना है
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत दौरे पर हैं. गुरुवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया गया. पश्चिम एशिया में जारी तेल संकट के बीच लिए गए इस फैसले को अहम माना जा रहा है.
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की ओर से अप्रैल से वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में तेजी आई है. यही नहीं, वेनेजुएला भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर भी उभरा है.
हैदराबाद हाउस में हुई प्रधानमंत्री मोदी और डेल्सी रोड्रिगेज के बीच हुई इस बैठक में खनिजों, फार्मा, कृषि और ऑटोमोबाइल सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत हुई.
इस मुलाकात की जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत बहुत अहम और बिजनेस जैसी थी. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला कई सालों से भारत को ऊर्जा के लिए एक स्थिर मांगकर्ता के तौर पर देखता है.
मीटिंग में क्या हुआ?
रुद्रेंद्र टंडन ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बैठक में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का साफ संदेश था कि उनका देश भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार और इस तथ्य के मद्देनजर भारत को 'पसंदीदा ऊर्जा भागीदार' के रूप में देखता है.
उन्होंने कहा कि 'बातचीत में मुख्य रूप से ऊर्जा साझेदारी बनाने पर बातचीत हुई. वेनेजुएला भारत को आने वाले कई सालों तक एक स्थिर और भरोसेमंद खरीदार के रूप में देखता है. इसलिए, भारत और वेनेजुएला के लिए ऊर्जा क्षेत्र में, मिलकर काम करने की पूरी संभावना है.'
उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान भारत ने वेनेजुएला के सामने 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा के डिविडेंड बकाये का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, 'यह हमारा पैसा है. वेनेजुएला इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर हैं.'
टंडन ने कहा कि 'बातचीत में दूसरे क्षेत्र में भी आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने पर बात हुई. वेनेजुएला एक बहुत बड़ा देश है जो रिसोर्स से भरपूर है, यहां टैलेंटेड, मेहनती लोग हैं जो अब लगातार ग्रोथ के रास्ते पर आगे बढ़ने के संकेत दे रहे हैं. इसलिए, सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि माइनिंग, एनिमल हस्बैंड्री, ट्रांसपोर्टेशन, कृषि उपकरण, ऑटोमोटिव सेक्टर और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र में भी बहुत सारे मौके हैं. इन पर भी बात हुई, और पूरा आइडिया यह था कि ऐसे तरीके खोजे जाएं, जिनसे इंडियन कमर्शियल एंटिटीज वेनेजुएला के मार्केट में सक्सेसफुली एंटर कर सकें और इन सेक्टर में एक नई पार्टनरशिप बन सके.'
उन्होंने आगे कहा, 'कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि बातचीत बहुत बिजनेस जैसी और बहुत जरूरी थी. दोनों डेलिगेशन के बीच सच्ची गर्मजोशी थी और वेनेजुएला की तरफ से माना गया कि भारत अच्छे और बुरे दोनों समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा रहा है. यह एक लंबा संबंध है और भविष्य में हम उनके लिए एक पसंदीदा साझेदार हैं.'
यह भी पढ़ेंः अमेरिका को पुतिन की दो टूक- भारत से रिश्ते खराब करवाना संभव नहीं, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए ये ठीक नहीं
वेनेजुएला से बढ़ी तेल की खरीदारी
भारत कभी वेनेजुएला के कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक था. एक वक्त भारत वेनेजुएला से हर रोज 4 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल खरीदता था. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण खरीद बंद हो गई थी. इस साल जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने के बाद अमेरिका ने प्रतिबंध हटा दिए, जिसके बाद तेल की खरीदारी एक बार फिर बढ़ गई है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पिछले एक महीने के दौरान वेनेजुएला ने भारत को हर दिन 4.37 लाख बैरल कच्चा तेल सप्लाई किया है. इसके साथ ही वेनेजुएला अब सऊदी अरब की जगह भारत का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है.
विदेश सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने कहा, 'वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल रिजर्व में से एक है. भारतीय अर्थव्यवस्था तेल की एक बड़ी और बढ़ती हुई कंज्यूमर है और आने वाले कई सालों तक इसकी डिमांड में स्टेबल ग्रोथ रहेगी. इसलिए ऊर्जा क्षेत्र में हम एक परफेक्ट कॉम्प्लिमेंट्री देखते हैं. असल में, हमारी स्पॉट परचेज में, वेनेजुएला इस महीने पहले ही तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, इसलिए जाहिर है, आज की चर्चा ऊर्जा साझेदारी बनाने पर फोकस थी.'
5 दिन के दौरे पर आईं हैं रोड्रिगेज
डेल्सी रोड्रिगेज 3 जून को पांच दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं. उनका मकसद दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करना है. यह रोड्रिगेज का छठा भारत दौरा है. इससे पहले वह 2015 में वेनेजुएला की विदेश मंत्री के तौर पर और 2019, 2023, 2024 और 2025 में उपराष्ट्रपति के तौर पर भारत आ चुकी हैं.
यह भी पढ़ेंः भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड डील में हो सकती है देरी, ब्रिटेन के मंत्री पीटर काइल ने बताई वजह