- नेपाल के पूर्व PM केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण बनी हुई है.
- बालेन शाह ने शपथ लेने के 24 घंटे में Gen-Z आंदोलन की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए.
- Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए सरकार ने एक और विस्तृत जांच आयोग गठित करने की घोषणा की है.
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के बाद देश की राजधानी काठमांडू समेत पूरे नेपाल में हालात सामान्य बने हुए हैं. गिरफ्तारी के बाद भी कहीं से बड़े विरोध-प्रदर्शन या सड़क पर उतरने की खबर नहीं है. खास बात यह है कि चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी ओली के समर्थन में आम जनता सामने आती नहीं दिखी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस कार्रवाई से संतुष्ट हैं. आम जनमानस नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के फैसले को साहसिक और जवाबदेही तय करने वाला कदम बता रहा है. सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, बालेन शाह की कार्रवाई की खुलकर तारीफ हो रही है.
शपथ के 24 घंटे के भीतर बड़ा फैसला
बता दें कि बालेन शाह ने शुक्रवार दोपहर नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. शपथ लेने के महज 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने अपने चुनावी वादों को अमल में लाते हुए बड़ा कदम उठाया. उन्होंने पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन से जुड़ी जांच आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई के आदेश दिए, जिसके आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी की गई.
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Gen-Z आंदोलन की दोबारा जांच
सरकार ने यह भी साफ किया है कि Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर एक और विस्तृत जांच बैठाई जाएगी. इस जांच में यह देखा जाएगा कि उस वक्त हिंसा के दौरान अधिकारियों की भूमिका क्या थी. क्या वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहे थे या सिर्फ ऊपर से मिले आदेशों का पालन कर रहे थे, इस बिंदु पर विशेष फोकस रहेगा.
ओली की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज
ओली की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) में हलचल मच गई है. ललितपुर के च्यासल स्थित पार्टी मुख्यालय में पार्टी की अहम बैठक चल रही है. इसमें वरिष्ठ नेता, सांसद और संगठन के बड़े पदाधिकारी शामिल हैं. बैठक में आगे की राजनीतिक रणनीति, कानूनी लड़ाई और संभावित आंदोलन को लेकर मंथन किया जा रहा है.
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Gen-Z आंदोलन में 77 लोगों की मौत
जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में 77 लोगों की जान गई थी, जबकि करीब 85 अरब नेपाली रुपये से अधिक की संपत्ति को नुकसान हुआ था. इसी आंदोलन के दबाव में 9 सितंबर को केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और गृह मंत्री रमेश लेखक को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उनके खिलाफ मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी.
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ओली ने बताया बदले की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद केपी शर्मा ओली ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. उन्होंने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. वहीं आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग की भूमिका भी संदिग्ध रही है.
15 साल तक की सजा की आशंका
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो केपी ओली और रमेश लेखक को 15 साल तक की जेल हो सकती है. बालेन शाह को Gen-Z आंदोलन से जुड़ा नेता और समर्थक माना जाता है, ऐसे में उनकी सरकार की यह पहली बड़ी कार्रवाई व्यवस्था परिवर्तन और जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
जनता का समर्थन, युवाओं में उत्साह
बालेन शाह को हालिया चुनाव में बंपर जीत मिली थी, खास तौर पर युवाओं ने उन्हें खुलकर समर्थन दिया. अब उनकी इस सख्त कार्रवाई के बाद एक बार फिर युवाओं और आम जनता में नए नेतृत्व को लेकर उम्मीदें और भरोसा मजबूत होता दिख रहा है.













