- रूस की मशहूर ब्लॉगर ने एक वीडियो में रूसी अधिकारियों की आलोचना करते हुए बढ़ती समस्याओं पर चिंता जताई है
- वीडियो में उन्होंने बाढ़, प्रदूषण, शिकार, इंटरनेट ब्लैकआउट और बढ़ती कीमतों सहित कई मुद्दे उठाए हैं
- पुतिन की लोकप्रियता यूक्रेन युद्ध के बाद लगातार गिर रही है और आर्थिक व सामाजिक तनाव बढ़ रहे हैं
एक मशहूर ब्लॉगर क्या कर सकता है, इसका अंदाजा इस खबर में आपको लग जाएगा. रूस की एक मशहूर ब्लॉगर ने रूसी अधिकारियों की आलोचना करते हुए एक वीडियो बनाया, जो वायरल हो गया. इसके बाद क्रेमलिन को इसके नतीजों से जूझना पड़ रहा है, क्योंकि व्लादिमीर पुतिन की लोकप्रियता रेटिंग में लगातार छठे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है. इस ब्लॉगर का नाम है विक्टोरिया बोन्या. ये रूस में घर-घर में जानी जाती हैं और इन्हें 2006 में रियलिटी टीवी शो बिग ब्रदर के समकक्ष डोम-2 से प्रसिद्धि मिली. ब्लॉगर ने सोमवार को एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को चेतावनी दी कि रूस में बढ़ती समस्याएं बेकाबू हो सकती हैं.
आखिर क्या कह दिया
द गार्जियन के अनुसार, विक्टोरिया ने इंस्टाग्राम पर 18 मिनट के वीडियो में कहा, "लोग आपसे डरते हैं, कलाकार डरते हैं, गवर्नर डरते हैं." इस वीडियो को पिछले चार दिनों में 26 मिलियन व्यूज और 13 लाख से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं. उन्होंने उन मुद्दों की एक सूची गिनाई, जिनके बारे में उनका कहना है कि कोई भी रूस का गवर्नर पुतिन के सामने सीधे तौर पर बात उठाने की हिम्मत नहीं करेगा: दागेस्तान में बाढ़, काला सागर तट पर तेल प्रदूषण, साइबेरिया में पशुओं का बड़े पैमाने पर शिकार, इंटरनेट ब्लैकआउट और बढ़ती कीमतों और करों के कारण छोटे व्यवसायों पर दबाव.
रूस से बाहर रहने वाली बोन्या ने पूछा, "क्या आप जानते हैं कि खतरा क्या है?" "लोगों का डर खत्म हो जाएगा, और उन्हें एक कुंडलित स्प्रिंग में दबाया जा रहा है, और एक दिन वह कुंडलित स्प्रिंग टूटकर बाहर निकल जाएगी."
मास्को का रिस्पॉन्स पॉजिटिव
गुरुवार को मॉस्को ने एक असामान्य कदम उठाते हुए सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना को स्वीकार किया और कहा कि बोन्या द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए काम जारी है. इन्फ्लुएंसर की टिप्पणियों में पुतिन या यूक्रेन युद्ध को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह हस्तक्षेप मॉस्को के साथ मिलिभगत से हो सकता है ताकि इस साल के अंत में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले जनता की शिकायतों को सुना जा सके.
यह दृष्टिकोण क्रेमलिन की जानी-पहचानी रणनीति का हिस्सा है: पुतिन को "अच्छा जार" के रूप में पेश करना, जिसे भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा अंधेरे में रखा गया है. इस कहानी ने राष्ट्रपति को देश की समस्याओं का दोष अपने अधीनस्थों पर डालने में मदद की है, जिससे असंतोष बढ़ने के बावजूद उनकी व्यक्तिगत छवि बनी हुई है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रतिक्रिया मिलिभगत से होने की संभावना नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में पनप रहे असंतोष की एक सहज प्रतिक्रिया थी.
रूस के लोग क्या सच में परेशान
मॉस्को स्थित पॉलिटिकल एनालिस्ट और पुतिन की विचारधारा पर हाल ही में प्रकाशित पुस्तक के लेखक आंद्रेई कोलेसनिकोव ने कहा, "युद्ध की थकान वास्तव में हावी होने लगी है. लोगों के मन में यह बात धीरे-धीरे समझ में आने लगी है कि जो कुछ भी हो रहा है वह युद्ध का ही परिणाम है."
Photo Credit: Bloomberg
कोलेसनिकोव ने आगे कहा कि आर्थिक मंदी से लेकर इंटरनेट पर बढ़ते प्रतिबंधों तक, युद्ध के दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को अधिकारियों के लिए समझाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है. पुतिन के निर्वासित पूर्व सलाहकार अब्बास गाल्यामोव ने कहा कि बोन्या जैसी रूसी हस्तियों की सार्वजनिक अपील से समाज में असंतोष और बढ़ सकता है. उन्होंने कहा, "बोन्या विपक्ष के खेमे में एक बिल्कुल नया दर्शक वर्ग ला रही हैं, जो पहले मौजूद नहीं था." उन्होंने कहा, "उनकी असंतुष्टि भी बढ़ रही है, इंटरनेट में समस्याएं हैं, दुकानों में कीमतें बढ़ रही हैं, युद्ध उनके लिए परेशानी का सबब बन रहा है. सरकार उनके निजी जीवन में दखल दे रही है."
पुतिन की लोकप्रियता गिर रही
सरकारी और स्वतंत्र संगठनों द्वारा किए गए हालिया जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, पुतिन की लोकप्रियता और विश्वास रेटिंग फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है. बुधवार को शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक में, राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था में तनाव को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया और सरकार और केंद्रीय बैंक पर इस वर्ष प्रदर्शन उम्मीदों से कम रहने का कारण बताने का दबाव डाला.
पुतिन को युद्ध समर्थक ब्लॉगरों के उग्र गुस्से का भी सामना करना पड़ रहा है, जिनमें से कुछ मोर्चे पर तैनात इकाइयों के साथ रहते हैं. ये ब्लॉगर युद्ध के मैदान में मॉस्को की धीमी प्रगति और बढ़ते नुकसान से लगातार निराश होते जा रहे हैं. रूस टुडे के पत्रकार एंड्री फिलातोव ने इस सप्ताह लिखा: “वास्तविक नुकसान या तो पूरी तरह छिपाए जा रहे हैं या उन्हें समय के साथ फैलाया जा रहा है, जिससे शीर्ष स्तर पर यह धारणा बन रही है कि स्थिति इतनी गंभीर नहीं है. परिणामस्वरूप, सेना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है.”
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