Women's Day Special: ईरान की बेहद सफल, प्रभावशाली और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी ये महिलाएं

ईरान की महिलाओं की कहानी केवल संघर्ष, हिजाब या विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रतिभा, साहस और आत्मसम्मान की एक लंबी लड़ाई की कहानी है. सख्त राजनीतिक व्यवस्था, सामाजिक नियंत्रण और धार्मिक नियमों के बावजूद कई ईरानी महिलाओं ने अपनी अलग पहचान बनाई है.

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  • ईरान में एक कहानी उन महिलाओं की है, जिन्होंने राजनीतिक दबाव और सीमित आजादी के बीच भी अपने लिए रास्ता बनाए.
  • फरजानेह अलीहानी ने दिखाया कि आर्थिक आत्मनिर्भरता भी प्रतिरोध का तरीका है. तो नरगेस मोहम्मदी अब भी जेल में हैं.
  • गणित की सीमाएं तोड़ने वाली मरयम मिर्जाखानी संदेश देती हैं कि विज्ञान पर किसी देश या जेंडर का एकाधिकार नहीं है.
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ईरान का जिक्र जब भी होता है तो तस्वीरों में विरोध, हिजाब, जेल और दमन दिखाई देता है. लेकिन इसी ईरान में एक कहानी उन महिलाओं की है, जिन्होंने सख्त सामाजिक नियमों, राजनीतिक दबाव और सीमित आजादी के बीच भी अपने लिए रास्ता बनाए. ये महिलाएं केवल सफल नहीं हैं, ये व्यवस्था से टकराव की एक मिसाल हैं. ईरान की महिलाएं यह साबित करती हैं कि प्रतिभा किसी सरकारी अनुमति की मोहताज नहीं बल्कि विपरीत हालात के बावजूद हासिल की जा सकती है.

ईरान पश्चिम एशिया के उन देशों में है, जहां उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है. इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और गणित जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या लंबे समय तक पुरुषों से ज्यादा रही है. 

मरयम मिर्जाखानीः गणित की सीमाएं तोड़ने वाली महिला

मरयम मिर्जाखानी इस पूरी पीढ़ी का चेहरा बन गईं. मरयम ईरान ही नहीं, पूरी दुनिया की बड़ी वैज्ञानिक हस्तियों में गिनी जाती हैं. 2014 में उन्होंने फील्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इसे गणित का नोबेल कहा जाता है. वे गणित में यह सम्मान पाने वाली पहली महिला थीं. तेहरान में पली बढ़ी मरयम की कहानी यह दिखाती है कि एक सख्त समाज में भी अगर शिक्षा का मौका मिले, तो वैश्विक चमत्कार हो सकता है. मरयम ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहते हुए जटिल ज्यामिति और डायनेमिक सिस्टम्स पर क्रांतिकारी काम किया.
मरयम का महत्व सिर्फ पुरस्कार में नहीं, बल्कि उस संदेश में है जो उन्होंने लाखों ईरानी लड़कियों को दिया कि विज्ञान पर किसी देश या जेंडर का एकाधिकार नहीं.

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शिरीन एबादी
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शिरीन एबादीः कानून से सत्ता को चुनौती तक

शिरीन एबादी ईरान की पहली महिला जज थीं. 1979 की क्रांति के बाद उन्हें जज पद से हटा दिया गया. लेकिन यहीं से उनका असली सफर शुरू हुआ. उन्होंने मानवाधिकार वकील के रूप में महिलाओं, बच्चों और राजनीतिक कैदियों के केस लड़े. 2003 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला. यह ईरान की किसी महिला को मिला पहला नोबेल था. आज वे निर्वासन में हैं, लेकिन उनका नाम ईरान में आज भी एक डर और एक उम्मीद दोनों है.

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समिरा मखमलबाफः कम उम्र में वैश्विक पहचान

ईरानी सिनेमा दुनियाभर में संवेदनशीलता और यथार्थ के लिए जाना जाता है. इसमें महिलाओं की भूमिका सिर्फ कैमरे के सामने नहीं, बल्कि कहानी के केंद्र में रही है. समिरा मखमलबाफ ने 18 साल की उम्र में कान्स फिल्म फेस्टिवल में अपनी फिल्म 'द ऐपल' से दुनिया को चौंका दिया. वे दुनिया की सबसे युवा निर्देशकों में शामिल हुईं. उनकी फिल्मों में ईरानी महिलाओं की चुप्पी, संघर्ष और सामाजिक विरोधाभास की साफ झलक दिखती हैं. उन्होंने सिनेमा को सत्ता से सवाल पूछने का औजार बनाया.

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तारानेह अलीदोस्ती और लेयला हातामीः अभिनय से आगे का साहस

तारानेह अलीदोस्ती और लेयला हातामी जैसी अभिनेत्रियां सिर्फ स्टार नहीं रहीं. तारानेह को ऑस्कर विजेता फिल्म द सेल्समैन में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है. मानवाधिकारों के लिए मुखर रहने वाली तारानेह को दिसंबर 2022 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करने के लिए जेल में डाल दिया गया था, लेकिन जनवरी 2023 में रिहा कर दिया गया. वहीं लेयला हातामी को असगर फरहादी की ऑस्कर जीतने वाली फिल्म 'ए सेपरेशन' में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है. उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में पहचान बनाई है. इन महिलाओं ने यह दिखाया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रतिरोध भी हो सकती है.

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किमिया अलीजादेह
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किमिया अलीजादेहः ओलंपिक से निर्वासन तक

किमिया अलीजादेह ईरान की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता थीं. उन्होंने ताइक्वांडो में ये पदक हासिल किया था. रियो ओलंपिक 2016 में उन्हें कांस्य पदक हासिल हुआ था. लेकिन बाद में उन्होंने देश छोड़ दिया. तब उन्होंने कहा था, “मैं उन लाखों महिलाओं में से एक हूं जिन्हें सिर्फ दिखावे के लिए इस्तेमाल किया गया." बाद में वो जर्मनी के लिए खेलीं.

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मसिह अलीनेजादः सोशल मीडिया से आंदोलन

मसिह अलीनेजाद ने My Stealthy Freedom और White Wednesdays जैसे अभियानों के जरिए महिलाओं को अपनी कहानियां साझा करने का मंच दिया. आज वे निर्वासन में हैं. उन पर हमले की साजिशें हुईं, लेकिन उनकी आवाज और तेज होती गई. इससे डिजिटल स्पेस ईरानी महिलाओं के लिए नया मैदान बना. यहां सेंसरशिप है, लेकिन पूरी तरह चुप्पी नहीं. मीडिया और डिजिटल स्पेस आवाज सीमाएं करती हैं जिसे आज पूरी दुनिया में सुना जा रहा है.

गोलशीफ्तेह फराहानी
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गोलशीफ्तेह फराहानीः सीमाओं से परे कलाकार

गोलशीफ्तेह फराहानी ईरान की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में से एक रही हैं. लेकिन जब उन्होंने विदेश में बिना हिजाब सार्वजनिक उपस्थिति दी, तो ईरान में उनके काम पर रोक लगा दी गई. उन्होंने देश छोड़ा और हॉलीवुड और यूरोपीय सिनेमा में पहचान बनाई. उनकी कहानी बताती है कि आजादी की कीमत कभी-कभी निर्वासन होती है.

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नरगेस मोहम्मदी
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नरगेस मोहम्मदीः जेल से नोबेल पुरस्कार तक

नरगेस मोहम्मदी एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. वे मृत्युदंड और महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ लगातार बोलती रहीं. इसके बदले उन्हें बार-बार जेल, एकांत कारावास और स्वास्थ्य उपेक्षा झेलनी पड़ी. 2023 में उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिला. तब वे जेल में थीं.

अनुशेह अंसारीः अंतरिक्ष तक पहुंची ईरानी महिला

अनुशेह अंसारी पहली ईरानी महिला अंतरिक्ष यात्री बनीं. अनुशेह अपने दम पर अंतरिक्ष की यात्रा के लिए भुगतान करने वाली पहली महिला बनीं. वे एक सफल टेक उद्यमी भी हैं. उनकी कहानी बताती है कि सपनों की ऊंचाई सीमाओं से बड़ी हो सकती है.

ईरान में कई महिलाएं टेक स्टार्टअप्स, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आगे बढ़ रही हैं. फरजानेह अलीहानी जैसी उद्यमी महिलाओं ने दिखाया कि आर्थिक आत्मनिर्भरता भी प्रतिरोध का एक तरीका है. इन ईरानी महिलाओं की सफलता अलग और बेहद खास है क्योंकि ये सत्ता की निर्धारित सीमाओं के भीतर पनपी है. यह समझौतों के बावजूद हासिल हुई है और अक्सर व्यक्तिगत कीमत पर आई हैं. कई महिलाओं को जेल जाना पड़ा, देश छोड़ना पड़ा, कई ने चुप रहकर आगे बढ़ने का रास्ता चुना. 

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