- ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई 40 दिनों से सार्वजनिक रूप से गायब हैं और उनकी सेहत को लेकर अनिश्चितता है.
- अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों के अनुसार मोजतबा कोमा में हैं और शासन के फैसलों में शामिल नहीं हो रहे हैं.
- मोजतबा का इलाज कोम में हो रहा है. वहीं AI वीडियो ने विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े किए हैं.
ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद अब बंदूकें भले शांत हो गई हों, लेकिन तेहरान की सत्ता के भीतर उठ रहा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा. करीब 40 दिनों से सार्वजनिक रूप से गायब ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. क्या वे सच में शासन संभाल रहे हैं या पर्दे के पीछे कुछ और ही चल रहा है?
‘बेहोश और शासन से दूर'
The Times की रिपोर्ट के मुताबिक, एक डिप्लोमैटिक मेमो में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई कोम में इलाज के दौरान बेहोश हैं और शासन से जुड़े किसी भी फैसले में शामिल नहीं हो पा रहे. यह इनपुट कथित तौर पर अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों के साझा आकलन पर आधारित है. अगर यह सच है, तो इसका मतलब है कि ईरान इस वक्त 'de facto leadership vacuum' यानी वास्तविक नेतृत्व की कमी से जूझ रहा है.
पिता की मौत के बाद मिली सत्ता, अब खुद पर सवाल
बता दें कि अमेरिका-इजरायल हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया था. लेकिन सत्ता संभालने के कुछ ही समय बाद उनकी सेहत को लेकर जो खबरें सामने आईं, उसने पूरे सिस्टम को अनिश्चितता में डाल दिया है.
यह भी पढ़ें- 'पाषाण युग' में भेज दूंगा से 'स्वर्ण काल' लाऊंगा... 2 ट्वीट से समझिए ईरान पर ट्रंप ने कितनी पलटी मारी
सत्ता किसके हाथ में? ‘शैडो लीडरशिप' की चर्चा
मोजतबा की अनुपस्थिति ने एक नई बहस को जन्म दिया है. क्या ईरान में इस वक्त पर्दे के पीछे कोई ‘शैडो लीडरशिप' काम कर रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में तीन ताकतें सबसे ज्यादा प्रभावशाली हो सकती हैं:
रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC)- जो सैन्य और रणनीतिक फैसलों पर पकड़ रखता है.
धार्मिक परिषद (Assembly of Experts)- जो सुप्रीम लीडर के चयन की जिम्मेदार संस्था है
इनर सर्कल ऑफ खामेनेई फैमिली- जो सत्ता के भीतर वर्षों से प्रभावशाली रहा है.
यानी भले चेहरा गायब हो, सिस्टम पूरी तरह रुका नहीं है. बल्कि और ज्यादा अपारदर्शी हो गया है.
क्या फिर से बदलेगा सुप्रीम लीडर?
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद आजीवन होता है. लेकिन अगर मौजूदा लीडर काम करने की स्थिति में नहीं है, तो 'Assembly of Experts' को नया नेता चुनने का अधिकार है. यही वजह है कि अब यह सवाल भी उठ रहा है. क्या मोजतबा को औपचारिक रूप से हटाकर किसी और को सामने लाया जा सकता है? या फिर उनकी स्थिति छिपाकर सत्ता उसी नाम पर चलाई जाएगी?
यह भी पढ़ें- डोनाल्ड ट्रंप के लिए कितनी राहत लेकर आया है युद्ध विराम समझौता, कितने दबाव में थे अमेरिकी राष्ट्रपति
कोम बना ‘पावर और सस्पेंस' का केंद्र
कोम सिर्फ धार्मिक शहर नहीं, बल्कि ईरान की वैचारिक रीढ़ है. मोजतबा का यहीं इलाज होना कई संकेत देता है. जैसे कि यहां शीर्ष धर्मगुरुओं की मौजूदगी है. सुरक्षा के लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाका है और सत्ता के फैसलों के लिए ‘क्लोज्ड डोर' वातावरण कोम में है. यही वजह है कि कोम अब इलाज का केंद्र ही नहीं, बल्कि सस्पेंस और सत्ता का भी केंद्र बन गया है.
कोम में बन रहा मकबरा
अली खामेनेई के लिए बनाए जा रहे कथित मकबरे में एक से ज्यादा कब्रों की जगह होना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है. क्या यह सिर्फ परिवार के लिए पारंपरिक व्यवस्था है या फिर किसी संभावित बड़े नुकसान की आशंका? खुफिया इनपुट्स भले इशारा कर रहे हों, लेकिन बिना आधिकारिक पुष्टि के यह सवाल और रहस्यमय हो गया है.
ईरान की ‘साइलेंट स्ट्रेटेजी'
ईरान का आधिकारिक रुख बेहद सीमित और नियंत्रित रहा है. अब तक सिर्फ मोजतबा के घायल होने की पुष्टि की गई है. सुप्रीम लीडर बनने से अब तक कोई लाइव वीडियो या सार्वजनिक संबोधन नहीं हुआ है. ऐसे में मोजतबा की सेहत को लेकर सवाल और ज्यादा गहराता जा रहा है.
यह भी पढ़ें- US इंटेलिजेंस की चेतावनी: ईरान से ‘लगातार खतरा', व्हाइट हाउस ने क्यों कम आंका?
बयान भी 'रीड आउट' के जरिए जारी
यह रणनीति नई नहीं है. ईरान पहले भी बड़े संकटों में जानकारी को नियंत्रित करके 'स्टेबिलिटी का नैरेटिव' बनाए रखने की कोशिश करता रहा है.
AI वीडियो- प्रोपेगैंडा या मजबूरी?
मोजतबा खामेनेई का AI-जनरेटेड वीडियो सामने आना इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और विवादित हिस्सा है.
विशेषज्ञ इसे दो तरह से देख रहे हैं:
प्रोपेगैंडा टूल: जनता को यह दिखाने के लिए कि नेतृत्व सक्रिय है.
मजबूरी: असली फुटेज उपलब्ध न होने की स्थिति
लेकिन इसका उल्टा असर भी हुआ. विश्वसनीयता और कम हो गई.
यह भी पढ़ें- ईरान-अमेरिका सीजफायर: जंग थमी, लेकिन भारत के लिए छोड़ गई 4 बड़े सबक
सीजफायर के बाद असली परीक्षा
ईरान के लिए असली चुनौती अब युद्ध नहीं, बल्कि आंतरिक स्थिरता है. अगर मोजतबा सामने नहीं आते, तो सत्ता पर सवाल और गहराएंगे. अगर सामने आते हैं, तो उनकी हालत पर पूरी दुनिया की नजर होगी. और अगर नहीं आते, तो लीडरशिप ट्रांजिशन की प्रक्रिया तेज हो सकती है.
40 दिन बाद क्या होगा खुलासा?
करीब 40 दिनों से जारी रहस्य अब अपने चरम पर है. सीजफायर ने एक तरह से वक्त दे दिया है. अब दुनिया इंतजार कर रही है कि ईरान इस सस्पेंस को कैसे खत्म करता है. सबसे बड़ा सवाल वही है कि क्या मोजतबा खामेनेई खुद सामने आकर सभी अटकलों पर विराम लगाएंगे, या फिर यह रहस्य ईरान की सत्ता का नया सामान्य बन जाएगा?













