- ट्रंप ने पांच दिनों के भीतर ईरान से युद्ध विराम की संभावना जताई है, जिससे वैश्विक शांति की उम्मीद बनी है
- ट्रंप के इस दावे के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कमी और अमेरिकी शेयर बाजार में बढ़ोतरी हुई
- भारत सहित वैश्विक शेयर बाजारों में भारी नुकसान हुआ है, युद्ध समाप्ति पर बाजारों में तेजी की संभावना है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पांच दिनों के अंदर ईरान से डील हो सकती है और जंग रुक सकती है. हालांकि, ईरान की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन अगर सच में जंग रुक जाती है तो दुनिया एक झटके में चैन की सांस ले लेगी. आपको जानकर हैरानी होगी कि ट्रंप के मात्र दावे से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 11 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार (S&P 500) में 2.25% का उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, हालांकि बाद में ये फिर चढ़ कर 100 के पार चली गई. वहीं WTI क्रूड ऑयल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई.
होर्मुज खुलने का असर
विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार, 1 मार्च से 23 मार्च को 1600 जीएमटी तक, मालवाहक जहाजों ने केवल 144 बार जलडमरूमध्य पार किया - जो शांति काल की तुलना में 95 प्रतिशत की कमी है. केप्लर के आंकड़ों से पता चला है कि इनमें से 91 तेल और गैस टैंकरों ने जलडमरूमध्य पार किया और आधे से अधिक भरे हुए थे, जिनमें से अधिकांश पूर्व की ओर जलडमरूमध्य से बाहर जा रहे थे. साफ है कि ट्रंप भले ही बार-बार अपने बयान बदलते हों, मगर अमेरिका की साख ऐसी है कि उसके राष्ट्रपति का बोलना ही अरबों-खरबों का खेल कर देता है. अगर ट्रंप का दावा सच होता है तो जाहिर है होर्मुज खुल जाएगा और तेल और गैस की कीमतें स्थिर हो जाएंगी. दुनिया भर में इनकी किल्लत दूर हो जाएगी और उद्योग-धंधे फिर से शुरू हो जाएंगे.
सोने की कीमत
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों द्वारा जोखिम कम करने के कारण सोने की कीमतों में तेजी से अभी अस्थिरता बनी रहेगी. ईरान युद्ध से मुद्रास्फीति की आशंकाएं बढ़ रही हैं, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो रही हैं और वैश्विक विकास के दृष्टिकोण पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. हालांकि, उनका यह भी कहना है कि दीर्घावधि में धन के भंडार के रूप में सोने की भूमिका फिर से मजबूत होगी. ईरान संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही, हाजिर सोने की कीमत 15% गिर गई है और जनवरी के अपने उच्चतम स्तर से 22% नीचे है. जाहिर है अगर ईरान से जंग खत्म होती है तो सोने और चांदी के भाव स्थिर होंगे. साथ ही कीमतों में कमी भी आ सकती है.
शेयर बाजार
इस जंग का बड़ा असर दुनिया के शेयर बाजार पर भी पड़ा है. अकेले भारतीय शेयर मार्केट पर ही इसका तगड़ा असर देखने को मिला है. बीएसई के आंकड़ों के अनुसार जंग की शुरूआत से लेकर 20 मार्च तक मार्केट से करीब 34 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके थे. 27 फरवरी 2026 को भारतीय बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 46,325,200.41 करोड़ रुपये था. युद्ध के समय बीते 15 कारोबारी दिनों में ये गिरकर 20 मार्च तक 42,876,298.38 करोड़ रुपये पर आ गया. यानी निवेशकों के 34 लाख करोड़ रुपये डूब गए. हर दिन के हिसाब से देखें तो ये आंकड़ा 2.29 लाख करोड़ रुपये प्रति ट्रेडिंग दिन के हिसाब से बैठता है. जाहिर है जंग रुक गई तो भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों में रौनक लौट सकती है.
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