ट्रंप सरकार ने अमेरिकी रिजर्व बैंक को भेजा समन, समझिए इससे भारत में सोना-चांदी और महंगा क्यों होगा

US फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा है कि इस केंद्रीय बैंक को अमेरिका के न्याय विभाग ने समन भेजा है. यह खबर आते ही सोने-चांदी की कीमतों में और आग लग गई है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व को निशाने पर लिया
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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के बीच मौद्रिक नीति को लेकर तनाव बढ़ गया है
  • फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने न्याय विभाग द्वारा सम्मन जारी किए जाने की जानकारी दी है
  • फेडरल रिजर्व पर दबाव के कारण सोना 4,600 डॉलर और चांदी 85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार और वहां के केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व में तनातनी बढ़ गई है. फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा है कि इस केंद्रीय बैंक को अमेरिका के न्याय विभाग ने समन भेजा है. पॉवेल ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका की मौद्रिक नीतियों पर कंट्रोल करना चाहते हैं और उसी दबाव अभियान के तहत यह किया जा रहा है. ट्रंप सरकार के इस फैसले के बाद सोना और चांदी की कीमतों में और आग लग गई है. चलिए आपको बताते हैं कि ट्रंप ने फेडरल रिजर्व को कैसे घेरने की कोशिश की है और उनके इस कदम से सोना-चांदी की कीमत कैसे बढ़ गई है.

ट्रंप ने फेडरल रिजर्व बैंक के खिलाफ कैसे मोर्चा खोला है?

रविवार, 11 जनवरी की रात जारी एक वीडियो मैसेज में, पॉवेल ने कहा कि न्याय विभाग ने फेडरल रिजर्व को ग्रैंड जूरी के सामने सवाल-जवाब के लिए समन जारी किया है. पॉवेल ने कहा कि जून में उनकी सीनेट के सामने दी गई गवाही के लिए उनपर "आपराधिक केस चलाने की धमकी" दी गई है. उन्होंने पिछले साल फेडरल रिजर्व की बिल्डिंग की रेनोवेशन प्रोजेक्ट को लेकर सीनेट के सामने बयान दिया था.

दरअसल ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में आक्रामक रूप से कटौती करे लेकिन इस केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष ने बार-बार इससे इनकार किया है. पॉवेल ने अपने बयान में कहा कि वह कानून के शासन का सम्मान करते हैं लेकिन "इस अभूतपूर्व कार्रवाई को (ट्रंप) सरकार की धमकियों और चल रहे दबाव के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए." उन्होंने कहा कि हमारे उपर आपराधिक केस चलने का खतरा इसलिए है क्योंकि हमले राष्ट्रपति की बातों को मानने की जगह जनता की सेवा की, अपने सबसे अच्छे मूल्यांकन के आधार पर फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें को निर्धारित किया है."

एनबीसी न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ऐसे किसी भी समन के बारे में जानकारी से इनकार किया. उन्होंने कहा: "मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता, लेकिन वह (अध्यक्ष पॉवेल) निश्चित रूप से फेड में बहुत अच्छे नहीं हैं, और वह इमारतें बनाने में भी बहुत अच्छे नहीं हैं."

अमेरिका के बैंक से कैसे तय होती हैं दुनिया में सोना-चांदी की कीमत?

अमेरिका का केंद्रीय बैंक पूरी दुनिया के लिए एक आधार के रूप में काम करता है. जब भी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें कम करने के दबाव में होता है, तो दुनिया की अन्य मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर कमजोर होने लगता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर सस्ता होने पर अन्य देशों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमत बढ़ जाती है.

इसी तरह जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था या बैंकिंग सिस्टम पर दबाव होता है, तो निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से पैसा निकालकर सोने और चांदी में निवेश करते हैं. इन्हें संकट के समय सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है. ट्रंप ने जैसे ही फेडरल बैंक को निशाने पर लिया है, सोना-चांदी की कीमतें और तेजी से भागी हैं. फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल द्वारा संभावित आपराधिक केस की चेतावनी के बाद पहली बार सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है.

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