- ईरान की फुटबॉल टीम ने खुद को फीफी वर्ल्ड कप की 'सबसे पीड़ित टीम' बताया है
- ईरान की टीम को अमेरिका में उनके मैच के तुरंत बाद कह दिया जाता है कि आप मैक्सिको लौट जाइए
- जंग से उपजे तनाव के बीच ईरान के कई सपोर्ट स्टाफ को अमेरिका में आने के लिए वीजा नहीं दिया गया है
मंच फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप का सजा हुआ है. दुनिया संभवतः आखिरी बार इस खेल के इतिहास के दो सबसे महान खिलाड़ी (GOAT) क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी को वर्ल्ड कप में खेलता देख रही है. ऐसे में बात सिर्फ दनादन दागे जाते गोल और उम्दा डिफेंस की होनी चाहिए थी. बात काबो वेर्दे जैसी अंडरडॉग टीमों की होनी चाहिए थी जिसने स्पेन के महारथियों को रोक दिया. लेकिन इन सबके बीच एक टीम ऐसी भी है जो खुद को वर्ल्ड कप की 'सबसे पीड़ित टीम' बता रही है. वह टीम ऐसा दावा करे भी क्यों नहीं. ईरान की टीम को अमेरिका में उनके मैच के तुरंत बाद कह दिया जाता है कि आप अपना बैग उठाइए और मैक्सिको लौट जाइए. न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले के बाद थके-हारे खिलाड़ियों को होस्ट देश ने हडबड़ी में निकलने का फरमान जारी कर दिया.
यह अकेला सबूत नहीं है जो ईरानी फुटबॉल टीम के दर्द को दिखाता है. दरअसल इस बार के फीफा वर्ल्ड कप में तीन देश होस्ट हैं- अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा. ईरान की टीम ऐसे समय वर्ल्ड कप में पहुंची है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है. भले अब अमेरिका-ईरान डील होने वाली है लेकिन मौजूदा तनाव ने फुटबॉल के खूबसूरत खेल को भी दागदार किया है. ईरान की टीम आरोप लगा रही है कि अमेरिकी सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है, लेबल प्लेइंग फिल्ड नहीं दे रही है.
गेम खत्म होते अमेरिका छोड़ने का फरमान
ईरान के कोच अमीर घालेनोई ने कहा है कि उनकी टीम शायद पूरे वर्ल्ड कप की "सबसे पीड़ित टीम" है. उनका आरोप है कि वर्ल्ड कप के पहले मैच के बाद उनकी टीम को लॉस एंजिलिस से तुरंत निकलकर मेक्सिको में बने उनके ट्रेनिंग बेस में लौटने के लिए मजबूर किया गया. अपने पहले मैच में ईरान ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला था. मैच के बाद कोच अमीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि आखिरी समय में टीम की यात्रा योजना बदल दी गई और उन्हें मंगलवार को तुरंत मेक्सिको लौटने के लिए कहा गया.
अमेरिका ने साफ नियम बना दिया है- ईरान के प्लेयर्स और कोच मैच से एक दिन पहले अमेरिका की जमीन पर आएंगे और मैच खत्म होते उसी दिन शाम में लौट जाएंगे. ऐसा नहीं है कि टीमें गेम के तुरंत बाद कभी अपने ट्रेनिंग कैंप नहीं लौटतीं. लेकिन कभी उन्हें मजबूर नहीं किया जाता है. ईरानी टीम का आरोप है कि उन्हें मजबूर किया गया.
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टीम को बदलना पड़ा अपना ट्रेनिंग कैंप
शुरुआत में ईरान ने अपना वर्ल्ड कप बेस कैंप अमेरिका के एरिजोना में बनाने की योजना बनाई थी. लेकिन तब जंग चल रही थी और अमेरिका में एंट्री को लेकर अनिश्चितता के कारण उसे अपना ट्रेनिंग कैंप बदलकर मेक्सिको के तिजुआना में करना पड़ा. इतना ही नहीं अमेरिकी अधिकारियों ने टीम के एक दर्जन से ज्यादा सपोर्ट स्टाफ के मेंबर्स को वीजा देने से इनकार कर दिया. इसकी वजह से वे मैचों के लिए यात्रा ही नहीं कर सके. अगर बेस कैंप अमेरिका में बनता तो ईरान के सपोर्ट स्टाफ ही अमेरिका में नहीं जा पाते.
यहां तक कि ईरान के फॉरवर्ड प्लेयर मेहदी तोराबी को केवल एक बार अमेरिका में एंट्री की अनुमति मिली थी. न्यूजीलैंड के खिलाफ वह भले बेंच पर थे लेकिन टीम परेशान थी कि जब रविवार को वापस बेल्जियम से अमेरिका में ही मुकाबला होगा तो यह प्लेयर कैसे खेलेगा. अच्छी बात यह है कि विवाद के बाद उन्हें अमेरिका का वीजा मिल गया है, जिससे वह टूर्नामेंट के बाकी मैच अमेरिका में खेल सकेंगे.
सपोर्ट स्टाफ का काम खुद कर रहे ईरान के कोच
मंगलवार की शाम ईरान के फेडरेशन ने एक बयान में कहा कि उसने फीफा से उन स्टाफ के मामलों पर कार्रवाई करने को कहा है जिन्हें वीजा नहीं मिला है. फेडरेशन ने बताया कि टीम के मीडिया से जुड़े काम भी टीम के एनालिस्ट संभाल रहे हैं, जो न तो उस काम में पेशेवर है और न ही यह सही है. फेडरेशन ने कहा, "हिस्सा लेने वाली बाकी 47 टीमों की तरह ही, ईरान से भी उम्मीद की जाती है कि पूरा ऑपरेशनल स्टाफ होना चाहिए, जिसमें टीम मैनेजर, मीडिया ऑफिसर और एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजर शामिल हों. लेकिन इन लोगों (सपोर्ट स्टाफ) के न होने से टीम के रोजमर्रा के कामकाज में साफ तौर पर मुश्किलें आती हैं और यह टूर्नामेंट के स्टैंडर्ड नियमों के मुताबिक भी नहीं है."
इसके अलावा टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले ईरानी फुटबॉल महासंघ ने आरोप लगाया था कि उन्हें दिए गए टिकटों का आवंटन रद्द कर दिया गया है. इसके बाद महासंघ ने फीफा से तटस्थता निष्पक्षता और मौजूदा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की थी.