Ebola Virus को लेकर WHO ने क्या कह दिया कि दुनिया भर में बढ़ गई चिंता? क्या है अब तक का अपडेट

Ebola Outbreak: इबोला के बढ़ते संक्रमण में कांगो में अब तक कम से कम 131 लोगों की मौत हो चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इबोला के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
एआई जेनेरेटेड तस्वीर

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस तेजी से फैल रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बार इबोला के फैलने की रफ़्तार और इसके दायरे को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है. डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि वह इस महामारी के 'फैलाव और इसकी रफ़्तार' से बेहद चिंतित हैं. इस खतरनाक प्रकोप के कारण कांगो में अब तक कम से कम 131 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है और इस संकट से निपटने के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई है.

चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार इबोला का 'बुंदीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन फैला है, जिसकी कोई स्वीकृत वैक्सीन (टीका) या सटीक इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है. आम तौर पर इबोला के 'जायरे' स्ट्रेन के लिए टीके उपलब्ध होते हैं. लेकिन इस नए स्ट्रेन ने डॉक्टरों के हाथ-पांव फुला दिए हैं. कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर बताया कि देश में अब तक लगभग 513 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.

रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति (ICRC) ने भी चेतावनी दी है कि अगर युद्धरत गुटों ने मानवीय सहायता और डॉक्टरों को सुरक्षित रास्ता नहीं दिया, तो इस महामारी को रोकना असंभव हो जाएगा.

Advertisement

स्क्रीनिंग से लेकर लैब तक... इबोला से निपटने के लिए भारत ने शुरू कर दीं तैयारियां

अमेरिका और जर्मनी हुए अलर्ट, उड़ानों पर पाबंदी और स्क्रीनिंग शुरू

कांगो में फैले इस वायरस की तपिश अब यूरोप और अमेरिका तक पहुंचने लगी है. जर्मनी ने मंगलवार को घोषणा की कि वह एक अमेरिकी नागरिक का इलाज करने के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर रहा है, जो कांगो में इस वायरस की चपेट में आया है. अमेरिकी ईसाई गैर-सरकारी संगठन 'सर्ज' (Serge) ने पुष्टि की है कि संक्रमित व्यक्ति उनका एक डॉक्टर है, जो कांगो में मरीजों की सेवा के दौरान इस वायरस के संपर्क में आ गया था.
इस घटना के बाद अमेरिका ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं. 

अमेरिकी सरकार ने इबोला प्रभावित अफ्रीकी देशों से आने वाले हवाई यात्रियों की स्क्रीनिंग (जांच) शुरू कर दी है और वहां के लिए वीजा सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. साथ ही, अमेरिका ने अपने नागरिकों को कड़ाई से सलाह दी है कि वे कांगो, दक्षिण सूडान और युगांडा की यात्रा करने से पूरी तरह बचें.

Advertisement

इतिहास का 17वां प्रकोप, अफ्रीका सीडीसी ने घोषित की इमरजेंसी

पिछले आधी सदी में इबोला वायरस अकेले अफ्रीका में 15,000 से अधिक लोगों की जान ले चुका है. कांगो के इतिहास में यह इस जानलेवा बीमारी का 17वां प्रकोप है. इससे पहले 2018 और 2020 के बीच कांगो में आए सबसे खतरनाक इबोला प्रकोप ने करीब 2,300 लोगों की जान ले ली थी. बुंदीबुग्यो स्ट्रेन का इतिहास देखें तो यह 2007 में युगांडा और 2012 में कांगो में तबाही मचा चुका है, जहां इसकी मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत तक दर्ज की गई थी.
हालात की गंभीरता को देखते हुए 'अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (Africa CDC) ने इसे पूरे महाद्वीप के लिए एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. 

यह भी पढ़ें:  अफ्रीका में Ebola के नए मामले: क्या भारत के लिए खतरा है? समझें सब कुछ आसान भाषा में

Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Bulldozer Action | Suvendu का खौफ, Mamata के 'पुष्पा' ने छोड़ा मैदान | Bengal
Topics mentioned in this article