मध्य पूर्व में जंग की आंच अब पाकिस्तान की दहलीज तक आ पहुंचा है. कर्जदार देश के नाम से मशहूर पाकिस्तान को लोन की रकम चुकाने का लगातार अल्टीमेटम मिल रहा है. दरअसल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही बुरे दौर से गुजर रही है. इस बीच जंग की लफ्टें आर्थिक चुनौती के भेष में पाकिस्तान के सामने आ खड़ी हुई है.
पाकिस्तान इस बात के कुख्यात है कि वह अपने मित्र देशों से कर्ज लेता है. इस फेहरिस्त में उसका सबसे अजीज दोस्त चीन भी है. हालांकि चीन ने मध्य पूर्व में जंग के बीच ही तेवर बदल लिया है और दोस्ती के बीच लक्ष्मण रेखा खींचते हुए बिजली का बकाया बिल पाकिस्तान से मांग रहा है.
भविष्य में सारे रास्ते बंद हो जाएंगे: चीन
चीन ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यूनाइटेड एनर्जी पाकिस्तान (UEP) का बकाया पैसा तुरंत चुकाया जाए. चीन का कहना है कि भुगतान में हो रही इस देरी से न केवल अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा टूटेगा, बल्कि भविष्य में निवेश के रास्ते भी बंद हो सकते हैं.
'द न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दिनों बीजिंग में मौजूद पाकिस्तानी राजदूत ने अपनी सरकार को एक 'अर्जेंट नोट' भेजा है. इस नोट में साफ कहा गया है कि अगर चीनी बिजली कंपनी का पैसा नहीं मिला, तो कंपनी का कामकाज ठप हो सकता है. ऐसी स्थिति में इसका सीधा असर पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा.
UAE ने लोन का पैसा मांगा वापस
मध्य पूर्व में जंग की आग में झुलस रहे संयुक्त राष्ट्र अमीरात ने भी पाकिस्तान को दिए लोन का पैसा वापस मांग लिया है. अमूमन यूएई, सऊदी अरब और चीन पाकिस्तान को दिए लोन की रकम को रोल ओवर कर देते हैं. लेकिन इस बार यूएई सख्ती से अपना पैसा वापस मांग लिया है.
मंत्री ने कहा, "अच्छा हुआ पाकिस्तान ने पैसा चुकाने की बात कह दी है. बेचारों को पैसों की जरूरत भी है. लेकिन एक बार याद रखना यूएई के भाईयों... कहीं आप भी अखंड भारत मत बन जाना,क्योंकि आपके यहां आधी आबादी हिंदुस्तानियों की है."
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम संयुक्त अरब अमीरात से लिए गए 3.5 बिलियन डॉलर के मैच्योर्ड लोन डिपॉजिट वापस करेंगे."
IMF के प्रेशर से शहबाज सरकार की नींद हराम
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने पाकिस्तान से कहा है कि वह पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों में आ रही विसंगतियों को जल्द से जल्द खत्म करे.
ऐसा ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में कीमतों में आई तेजी के बीच केंद्र सरकार की तरफ से कंज्यूमर्स को दी गई सब्सिडी की वजह से हुआ है. आईएमएफ के इस ऐलान के बाद शहबाज सरकार की बैचेनी और बढ़ गई है. आईएमएफ के प्रेशर के आगे पाकिस्तान फिर से कंगाली की कगार पर है.
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