अमेरिका ईरान में उलझा, यूक्रेन अकेला पड़ता जा रहा... जेलेंस्की पर क्या गुजर रही?

रूस और यूक्रेन जंग को पांच साल से ज्यादा हो गए हैं. ऐसे में युद्ध दोनों देशों पर बोझ बढ़ाते जा रहे हैं. अमेरिका भी ईरान से जंग में बिजी हो गया है. ऐसे में जेलेंस्की भी अकेले पड़ने के दबाव में हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रही दो बड़ी जंगों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की सामरिक ताकत को विभाजित किया है.
  • यूक्रेन में पांच साल से जारी युद्ध में अमेरिका और नाटो की मदद के बावजूद निर्णायक जीत नहीं मिल पाई है.
  • पश्चिमी देशों की सैन्य और आर्थिक सहायता में कमी से यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की चुनौतियां बढ़ रही हैं.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

दुनिया की सियासत इस वक्त दो जंगों के बीच फंसी है. एक, जो पांच साल से ज्यादा वक्त से यूरोप की जमीन पर सुलग रही है. और दूसरी, जो मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में अमेरिका को उम्मीद से कहीं ज्यादा उलझा चुकी है.ऐसे में सवाल बड़ा है कि क्या इन दो मोर्चों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की ताकत को बांट दिया है? और इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर क्या गुजर रही है?

दो जंग, एक सुपरपावर: बंटती ताकत का असर

यूक्रेन-रूस युद्ध फरवरी 2022 से जारी है, लेकिन 2026 आते-आते ये संघर्ष थकान की हद तक पहुंच चुका है. अमेरिका और नाटो ने यूक्रेन को अरबों डॉलर की मदद दी, लेकिन निर्णायक जीत अब भी दूर है. उधर, ईरान के साथ टकराव ने अमेरिका को एक नए और अनिश्चित मोर्चे पर खड़ा कर दिया है. खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तैनाती, तेल सप्लाई का दबाव और क्षेत्रीय अस्थिरता, ये सब वॉशिंगटन की रणनीतिक प्राथमिकताओं को बिखेर रहे हैं.

जेलेंस्की की चुनौती: घटती मदद, बढ़ती चिंता

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के लिए हालात पहले जैसे नहीं रहे. पश्चिमी देशों की सैन्य और आर्थिक मदद धीमी पड़ रही है. अमेरिका का फोकस ईरान और मिडिल ईस्ट की ओर शिफ्ट हो रहा है. यूरोप के कई देश भी घरेलू दबावों में उलझे हैं. जेलेंस्की बार-बार कह चुके हैं कि अगर समर्थन कम हुआ, तो जंग का संतुलन बदल सकता है.

यह भी पढ़ें- आज रात 8 बजे खत्म हो रही है डेडलाइन... बात नहीं बनी तो ईरान में क्या होगा? ट्रंप ने खुद बता दिया

Advertisement

ईरान मोर्चा: अमेरिका की उम्मीद से लंबी लड़ाई

अमेरिका को उम्मीद थी कि ईरान के साथ टकराव सीमित और नियंत्रित रहेगा. लेकिन हकीकत उलट साबित हो रही है. ईरान की क्षेत्रीय ताकत (प्रॉक्सी ग्रुप्स) संघर्ष को फैलाए हुए हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है. अमेरिका को लगातार सैन्य और आर्थिक संसाधन झोंकने पड़ रहे हैं. यानी ये जंग 'शॉर्ट ऑपरेशन' से 'लॉन्ग गेम' में बदल चुकी है.

कमजोर होती महाशक्तियां?

दोनों जंगों ने एक बड़े ट्रेंड को उजागर किया है.

अमेरिका: दो फ्रंट पर लड़ते-लड़ते संसाधनों का दबाव महसूस कर रहा है. 

रूस: यूक्रेन में लंबी जंग से आर्थिक और सैन्य थकान से जूझ रहा है. 

यूरोप: सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन की जद्दोजहद जारी है. 

यह पहली बार है जब वैश्विक ताकतें जरूरत से ज्यादा फैलाव की स्थिति में दिख रही हैं.

यह भी पढ़ें- 4 बॉम्बर, 64 फाइटर सहित 155 एयरक्राफ्ट... ट्रंप ने बताया- एक पायलट को बचाने में कैसे उतार दी पूरी फौज

Advertisement

असली कीमत कौन चुका रहा है?

इन भू-राजनीतिक शतरंज की सबसे बड़ी कीमत वही देश चुका रहे हैं, जो सीधे युद्ध में हैं. यूक्रेन में तबाही जारी है, जबकि ईरान क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा रहा है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका का रणनीतिक बिखराव यूक्रेन की किस्मत तय कर देगा? या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी दबाव है, जिससे निकलकर वॉशिंगटन फिर से अपने पुराने प्रभाव में लौटेगा? फिलहाल, तस्वीर यही कहती है. जब महाशक्तियां दो मोर्चों पर उलझती हैं, तो सबसे ज्यादा चोट उनके सहयोगियों को लगती है.

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: ईरान से अमेरिका ने कैसे रेस्क्यू किया अपना पायलट? | Meenakshi Kandwal | Kachehri