लाइव टीवी डिबेट में सपा नेता राजकुमार भाटी का गजब तर्क- 'अपराधी मजबूरी में गोली चलाते हैं

टीवी डिबेट में यूपी पुलिस के एनकाउंटर को लेकर समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच तीखी बहस देखने को मिली. सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने पुलिस के एनकाउंटर के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधी पुलिस पर बड़ी 'मजबूरी' में गोली चलाता है. उनके इस बयान पर एंकर सुचारिता ने उन्हें जमकर फटकार लगाई और कहा कि आप 'अपराधियों के वकील' बन रहे हैं. वहीं बीजेपी ने सपा पर अलग-अलग वोटरों को लुभाने के लिए दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.


'अपराधी बड़ी मजबूरी में पुलिस पर गोली चलाता है'
सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का हवाला देते हुए कहा कि एनकाउंटर किए नहीं जाते, बल्कि आत्मरक्षा में हो जाते हैं. उन्होंने यूपी सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 9 साल में 17,000 एनकाउंटर का मतलब है कि रोज 5 एनकाउंटर हो रहे हैं और रोजाना 3 पुलिसवालों को गोली लग रही है. भाटी ने तर्क दिया कि किसी भी राज्य में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद नहीं हो सकते कि वे रोज पुलिस पर गोलियां चलाएं. उन्होंने कहा, "अपराधी पुलिस पर बहुत रेयर केस में और बड़ी मजबूरी में गोली चलाता है, वरना उसके हाथ-पैर कांप जाते हैं." उन्होंने दावा किया कि या तो ये आंकड़े फर्जी हैं या यूपी में पुलिस की कोई हैसियत नहीं बची है.

'अपराधियों के वकील मत बनिए'
भाटी के 'मजबूरी' वाले बयान पर एंकर सुचारिता ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने उन्हें बीच में ही रोकते हुए कहा, "आप अपनी बातों से अपराधियों को डिफेंड कर रहे हैं. कृपया अपराधियों के वकील मत बनिए." एंकर ने तीखा सवाल किया कि क्या अपराधियों का डिफेंस तैयार करने वाले भाटी जी मारे गए पीड़ित 'सूर्या' के घर जाएंगे? इस पर बौखलाए भाटी ने एंकर पर चश्मा पहनकर (पूर्वाग्रह से) डिबेट करने का आरोप लगा दिया, जिसके जवाब में एंकर ने कहा कि आप धर्म का चश्मा लगाकर दूसरों को ज्ञान न दें.

सपा कर रही दोहरी राजनीति
बीजेपी प्रवक्ता शिवम त्यागी ने सपा पर वोट बैंक की राजनीति करने का बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक ही पार्टी के दो प्रवक्ताओं के अलग-अलग बयान कैसे हो सकते हैं. त्यागी ने कहा, "सपा ने अलग-अलग वोटरों को लुभाने के लिए अलग-अलग लाइन तय की है. एक तरफ सपा के अतीक जमाई कहते हैं कि असद को मुसलमान होने की वजह से मारा गया, वहीं राजकुमार भाटी कह रहे हैं कि अपराधी मजबूरी में गोली चलाते हैं."

त्यागी ने याद दिलाया कि आरोपी ने दिनदहाड़े बीच बाजार में चाकू मारा था, ऐसे में उसकी 'मानसिकता' या 'मजबूरी' को समझना बेमानी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 17,000 एनकाउंटर में मारे गए लोग अलग-अलग जातियों और धर्मों के थे. त्यागी ने अपनी बात खत्म करते हुए कड़े शब्दों में कहा, "अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता, उसका धर्म सिर्फ अपराध है."

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