झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने दिल्ली के 'जंतर-मंतर' आंदोलन की याद दिला दी. पेपर लीक और JSSC CGL सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के विरोध में छात्रों ने झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया. स्थिति तब बेकाबू हो गई जब पुलिस ने बैरिकेडिंग और कंटीले तारों से छात्रों को रोकने का प्रयास किया. उग्र छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पुलिस पर बोतलें व जूते-चप्पल फेंके. हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लिया. इस हिंसक झड़प में कई छात्र गंभीर रूप से घायल और बेहोश हो गए. वहीं, पुलिस का दावा है कि उग्र भीड़ के पथराव में उनके भी कई जवान घायल हुए हैं और कानून-व्यवस्था (धारा 163) बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग किया गया. छात्रों के नेता, जिन्हें 'झारखंड का सोनम वांगचुक' (देवेंद्र महतो) कहा जा रहा है, ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है. छात्रों की मुख्य मांग सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द कर पेपर लीक की CBI जांच कराने की है. उनका कहना है कि सरकार का 98% मांगें मानने का दावा पूरी तरह झूठा है. हालांकि, सरकार ने कार्रवाई करते हुए JPSC के पूर्व चेयरमैन को गिरफ्तार किया है.
इस पूरे बवाल पर सियासी घमासान भी तेज हो गया है. बीजेपी नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया और राहुल गांधी पर तंज कसा कि उन्हें प्रयागराज के छात्र तो दिखते हैं, लेकिन रांची के छात्रों की आवाज सुनाई नहीं देती. वहीं, राहुल गांधी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस बल प्रयोग की निंदा की है, जबकि अखिलेश यादव ने बेरोजगारी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. सत्तारूढ़ गठबंधन का आरोप है कि बीजेपी ने छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया है.