नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हिंसा से जुड़े बड़े मामले में अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने मुख्य आरोपी उमर खालिद और सह-आरोपी शर्जील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है. दोनों को फिलहाल तिहाड़ जेल में ही रहना होगा. वहीं, इसी मामले में शामिल पांच अन्य आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत दे दी है.
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल में देरी का लाभ इन दोनों आरोपियों को नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शर्जील इमाम की भूमिका बाकी आरोपियों से अलग है और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर सबूत मौजूद हैं. यही कारण है कि उनकी जमानत याचिका खारिज की गई.
कौन-कौन को मिली जमानत?
जिन पांच आरोपियों को राहत मिली है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
गुलफिशा फातिमा (उत्तर-पूर्वी दिल्ली की कांग्रेस नेता)
मीरान हैदर
शफाउर रहमान
मोहम्मद शकील खान
शादाब अहमद
इन सभी को लंबे समय से जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत दी है.
दिल्ली पुलिस ने इस केस में कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि इन लोगों ने 2020 में दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रची थी. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उमर खालिद और शर्जील इमाम को मुख्य साजिशकर्ता बताया था. चार्जशीट में डिजिटल सबूत, व्हाट्सएप ग्रुप चैट और गवाहों के बयान शामिल हैं.
क्यों है यह फैसला अहम?
पांच साल से अधिक समय जेल में बिताने के बावजूद उमर खालिद और शर्जील इमाम को जमानत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर आरोपों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर उन्हें राहत नहीं दी जा सकती. वहीं, बाकी आरोपियों को कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि उनका रोल अपेक्षाकृत कम था.