संसद में महिला आरक्षण बिल पर गरजीं प्रियंका गांधी, सुनती रहे सरकार के मंत्री-नेता

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  • प्रकाशित: अप्रैल 16, 2026

महिला आरक्षण के लिए देश की महिलाओं ने 150 साल तक संघर्ष किया. पंचायतों और नगरपालिकाओं में 33% आरक्षण से लेकर संसद और विधानसभा तक का सफ़र आसान नहीं रहा. कांग्रेस का दावा है कि राजीव गांधी से लेकर पीवी नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी तक—महिला आरक्षण को आगे बढ़ाने की ऐतिहासिक कोशिशें की गईं.


लेकिन संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए नए संशोधन बिल पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर लोकतांत्रिक ढांचे से समझौता कर रही है. बिल में संसद की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने और महिला आरक्षण को 2029 तक टालने की बात कही गई है.


कांग्रेस का कहना है कि 2011 की जनगणना में OBC वर्ग के आंकड़े मौजूद नहीं हैं और इससे OBC समुदाय के प्रतिनिधित्व पर सीधा असर पड़ेगा. विपक्ष यह भी आरोप लगा रहा है कि परिसीमन की स्पष्ट प्रक्रिया नहीं बताई गई है और इससे राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी बदली जा सकती है.


सदन में यह भी सवाल उठा कि अगर सरकार की मंशा साफ है, तो मौजूदा 543 सीटों में ही 33% महिला आरक्षण तुरंत क्यों नहीं लागू किया गया. बहस के दौरान महिला सांसदों ने याद दिलाया कि महिलाएं केवल आरक्षण की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि लोकतंत्र की बराबरी और संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रही हैं. यह वीडियो संसद में हुई इस ऐतिहासिक और तीखी बहस की पूरी कहानी, दावे और प्रतिदावों के साथ सामने रखता है.

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